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Dharamraj deshraj
dushmano ki jo sharaarat hogii
dushmano ki jo sharaarat hogii | दुश्मनो की जो शरारत होगी
- Dharamraj deshraj
दुश्मनो
की
जो
शरारत
होगी
आँसुओं
में
मेरी
बरकत
होगी
वो
सितम
करते
रहेंगे
तुझ
पर
ज़ुल्म
सहने
की
जो
आदत
होगी
ये
ज़माना
तेरा
दुश्मन
होगा
जब
भी
सच
कहने
की
हिम्मत
होगी
लोग
भूलेंगे
मुहब्बत
जिस
दिन
बस
उसी
रोज़
क़यामत
होगी
याद
रख
तेरी
भी
महलों
वाले
जिस्म
की
जाँ
से
बग़ावत
होगी
लोग
काँधे
पे
उठा
लें
तब
ही
आदमी
को
यहाँ
फुरसत
होगी
क्या
पता
था
कि
ज़माने
में
धरम
बोलना
सच
भी
मुसीबत
होगी
- Dharamraj deshraj
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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जब
राह
झूठ
की
चुनी
तो
लिफ़्ट
भी
मिली
और
सच
की
राह
में
मिले
पैरों
के
बस
निशाँ
Tanoj Dadhich
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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झूठों
ने
झूठों
से
कहा
है
सच
बोलो
सरकारी
एलान
हुआ
है
सच
बोलो
घर
के
अंदर
तो
झूठों
की
एक
मंडी
है
दरवाज़े
पर
लिखा
हुआ
है
सच
बोलो
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Rahat Indori
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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यूँँ
भी
किया
गया
है
मिरे
दर्द
का
इलाज़
काँटे
चुभा-चुभाके
तलाशा
है
दर्द
को
Dharamraj deshraj
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दर्द
सीने
में
पालकर
रखना
शर्त
पहली
है
शा'इरी
के
लिए
Dharamraj deshraj
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आ
भी
जाओ
ख़ुदारा
नये
साल
में
दिल
ने
तुमको
पुकारा
नये
साल
में
फिर
नये
ग़म
मिलेंगे
पता
है
हमें
वक़्त
का
है
इशारा
नये
साल
में
इल्तिज़ा
है
यही
यार
मिलकर
रहें
ग़म
न
देना
दुबारा
नये
साल
में
ज़ख़्म
पिछले
बरस
के
हरे
हैं
अभी
हौसला
हमने
हारा
नये
साल
में
भीख
में
उन
सेे
कोई
ख़ुशी
माँग
लूँ
ये
नहीं
है
ग़वारा
नये
साल
में
राहबर
ने
सताया
बहुत
रहज़नों
अब
तुम्हारा
सहारा
नये
साल
में
ज़ीस्त
की
उलझनों
को
भुलाकर
धरम
मुस्कुराओ
ख़ुदारा
नये
साल
में
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Dharamraj deshraj
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जो
दुखाते
हैं
दिल
गरीबों
का
वो
ग़ुनाहे-अज़ीम
करते
हैं
Dharamraj deshraj
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लोग
भूलेंगे
मुहब्बत
जिस
दिन
बस
उसी
रोज़
क़यामत
होगी
Dharamraj deshraj
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