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Dharamraj deshraj
yuñ bhi kiya gaya hai mire dard ka ilaaz
yuñ bhi kiya gaya hai mire dard ka ilaaz | यूँँ भी किया गया है मिरे दर्द का इलाज़
- Dharamraj deshraj
यूँँ
भी
किया
गया
है
मिरे
दर्द
का
इलाज़
काँटे
चुभा-चुभाके
तलाशा
है
दर्द
को
- Dharamraj deshraj
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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सारे
दुख
सो
जाएँगे
लेकिन
इक
ऐसा
ग़म
भी
है
जो
मिरे
बिस्तर
पे
सदियों
का
सफ़र
रख
जाएगा
Azm Shakri
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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ज़िन्दगी
पर
लिख
दिया
था
नाम
मैंने
राम
का
और
फिर
दुख
के
समुंदर
पार
सारे
हो
गए
Tanoj Dadhich
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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जो
कहता
है
वैसे
करना
पड़ता
है
इतना
प्यारा
है
कि
डरना
पड़ता
है
आँखें
काली
कर
देता
है
उसका
दुख
सबको
ये
जुर्माना
भरना
पड़ता
है
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Kafeel Rana
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हाए
कोई
दवा
करो
हाए
कोई
दु'आ
करो
हाए
जिगर
में
दर्द
है
हाए
जिगर
को
क्या
करूँँ
Hafeez Jalandhari
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कभी
सहर
तो
कभी
शाम
ले
गया
मुझ
से
तुम्हारा
दर्द
कई
काम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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जो
मुमकिन
हो
तो
सीने
में
बसा
लो
ये
दिल
भी
आशियाना
चाहता
है
Dharamraj deshraj
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जब
तक
कि
आदमी
को
सुकूँ
की
तलाश
है
सौ
इंक़िलाब
आएँगे
इक
इंक़िलाब
क्या
Dharamraj deshraj
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आप
थोड़ा
जो
मुस्कुरा
देते
दर्दो-ग़म
हम
सभी
भुला
देते
उम्र
भर
बस
उन्हें
दु'आ
देते
मुझको
मुझ
सेे
अगर
मिला
देते
यार
होते
अगर
जो
तुम
मेरे
मुस्कुराने
का
मशवरा
देते
जाने
होते
फ़ना
यहॉं
कितने
रुख़
से
पर्दा
ज़रा
हटा
देते
कितने
नादान
हैं
जहाँ
वाले
आदमी
को
ख़ुदा
बना
देते
सिर्फ़
मंज़िल
का
ज़िक्र
भर
करते
अपनी
नाकामियाँ
भुला
देते
यार
तुमको
'धरम'
समझ
लेता
सो
रहा
था
अगर
जगा
देते
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Dharamraj deshraj
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मेरा
दुश्मन
भी
मोतबर
न
हुआ
आँसुओं
का
मिरे
असर
न
हुआ।
आदमी
हैं
मगर
नहीं
इन्साँ
एक
जंगल
है
जो
नगर
न
हुआ।
उम्र
गुज़री
मिली
नहीं
मंज़िल
ख़त्म
आख़िर
मेरा
सफ़र
न
हुआ।
वो
मिरे
ग़म
में
यार
हँसता
है
वो
भी
पत्थर
है
राहबर
न
हुआ।
मुद्दतों
से
हँसी
नहीं
आई
ग़म
मिरा
है
कि
मुख़्तसर
न
हुआ।
ग़म
भुलाए
नहीं
बना
यारो
जाम
पीकर
भी
बेख़बर
न
हुआ।
बद्दुआएँ
बहुत
दीं
यारो
ने
मुझपे
अफ़सोस
कुछ
असर
न
हुआ।
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Dharamraj deshraj
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आँखों
में
अश्क
भर
के
कहो
यूँँ
न
अलविदा
एहसान
आँसुओं
का
उठाया
न
जाएगा
Dharamraj deshraj
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