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Mohd Arham
udhar chhapne lage the card shaa
udhar chhapne lage the card shaa | उधर छपने लगे थे कार्ड शादी के
- Mohd Arham
उधर
छपने
लगे
थे
कार्ड
शादी
के
इधर
लड़के
ने
सुन
के
ख़ुद-कुशी
कर
ली
- Mohd Arham
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मैं
तो
उस
वक़्त
से
डरता
हूँ
कि
वो
पूछ
न
ले
ये
अगर
ज़ब्त
का
आँसू
है
तो
टपका
कैसे
Ahmad Nadeem Qasmi
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हँसते
हँसते
निकल
पड़े
आँसू
रोते
रोते
कभी
हँसी
आई
Anwar Taban
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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आँसू
पोंछ
के
हँस
देता
है
आग
में
आग
लगाने
वाला
Arzoo Lakhnavi
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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चुपके
चुपके
रात
दिन
आँसू
बहाना
याद
है
हम
को
अब
तक
आशिक़ी
का
वो
ज़माना
याद
है
Hasrat Mohani
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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इश्क़
में
ख़ुद-कुशी
नहीं
करते
इश्क़
में
इंतिज़ार
करते
हैं
Rajesh Reddy
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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सारे
आँसू
तुझ
पर
ज़ाया'
क्यूँँ
कर
दें
हमनें
तेरे
बाद
भी
दिलबर
करने
हैं
Shikha Pachouly
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ग़म-ए-हिज्राँ
को
रुस्वा
कर
रहे
हैं
हम
इक
दुख
और
पैदा
कर
रहे
हैं
वो
मेरा
नाम
साहिल
से
मिटा
कर
अलग
दरिया
से
कतरा
कर
रहे
हैं
दिखाता
था
तमाशा
इक
मदारी
सो
अब
बच्चे
तमाशा
कर
रहे
हैं
ख़ुदा
जाने
की
उनका
क्या
बनेगा
जो
दरिया
से
किनारा
कर
रहे
हैं
सुलगती
रेत
रह
रह
कह
रही
है
ये
बादल
क्यूँ
तमाशा
कर
रहे
हैं
भुला
के
फ़िक्र
हम
महशर
की
'अरहम'
यहाँ
बस
दुनिया
दुनिया
कर
रहे
हैं
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Mohd Arham
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ग़रीबी
ओढ़ती
है
सिर
पे
चादर
अमीरी
जिस्म
ढकती
क्यूँ
नहीं
है
Mohd Arham
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सब्र
करता
नहीं
यहाँ
कोई
और
फल
चाहते
हैं
मीठा
लोग
Mohd Arham
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ख़ूँ
के
आँसू
मुझे
रुलाती
है
जब
कभी
याद
तेरी
आती
है
तेरी
फ़ुर्क़त
में
हमने
जाना
है
कि
घड़ी
शोर
क्यूँ
मचाती
है
एक
बच्चे
ने
क़ब्र
पे
लिक्खा
माँ
ये
दुनिया
बड़ा
सताती
है
रोज़
सूरज
ग़ुरूब
होते
ही
जिस्म
में
रूह
छटपटाती
है
दिल
जो
टूटा
तो
फिर
समझ
आया
काँच
की
चीज़
टूट
जाती
है
जब
भी
बढ़ता
हूँ
मंज़िलों
की
तरफ़
बद्दुआ
उसकी
मुस्कुराती
है
शाम
होते
ही
रोज़
तन्हाई
दिल
के
कोने
में
बैठ
जाती
है
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Mohd Arham
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हमने
जो
भी
किया
वो
बोया
है
उसको
पा
के
भी
हमने
खोया
है
जो
न
रोया
किसी
के
मरने
पर
तेरे
जाने
से
वो
भी
रोया
है
उसने
देखा
नहीं
मुझे
मुड़
के
वो
जो
बाहों
में
मेरे
सोया
है
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Mohd Arham
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