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Mohd Arham
sabr karta nahin yahaañ koii
sabr karta nahin yahaañ koii | सब्र करता नहीं यहाँ कोई
- Mohd Arham
सब्र
करता
नहीं
यहाँ
कोई
और
फल
चाहते
हैं
मीठा
लोग
- Mohd Arham
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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एक
दरिया
किनारे
बैठे
हैं
आज
हम
खु़द
को
हारे
बैठे
हैं
मेरे
शाने
पे
सिर
जो
रखते
थे
अब
वो
किसके
सहारे
बैठे
हैं
आज
वो
मुझ
सेे
मिलने
आएगी
सो
बदन
को
उतारे
बैठे
हैं
मुफ़्लिसी
हाथ
था
में
बैठी
है
बच्चे
भूखे
हमारे
बैठे
हैं
ज़ख़्म
भरने
को
आए
हैं
सारे
सो
तुझे
हम
पुकारे
बैठे
हैं
रात
के
तीन
बज
गए
'अरहम'
आप
किस
ग़म
के
मारे
बैठे
हैं
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Mohd Arham
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ख़ुद
को
तेरे
हवाले
करके
हम
रात
भर
करवटें
बदलते
हैं
Mohd Arham
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इक
तुझे
देखने
के
ख़ातिर
ही
बे-वजह
छत
पे
हम
टहलते
हैं
Mohd Arham
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तेरी
दुनिया
में
सब
नाशाद
आए
अकेले
हम
नहीं
बर्बाद
आए
दु'आ
में
इक
परिंदे
ने
ये
माँगा
ख़ुदाया
अब
नया
सय्याद
आए
बना
तस्वीर
इक
ऐसी
मुसव्विर
जिसे
देखूँ
तो
ख़ुद
की
याद
आए
जब
अपनी
ज़िंदगी
फ़ाक़े
में
गुज़री
मुसलसल
याद
तब
अज्दाद
आए
हमारे
शहर
का
दस्तूर
है
ये
यहाँ
जो
आए
वो
बर्बाद
आए
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Mohd Arham
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