gham-e-hijraan ko rusva kar rahe hain | ग़म-ए-हिज्राँ को रुस्वा कर रहे हैं

  - Mohd Arham
ग़म-ए-हिज्राँकोरुस्वाकररहेहैं
हमइकदुखऔरपैदाकररहेहैं
वोमेरानामसाहिलसेमिटाकर
अलगदरियासेकतराकररहेहैं
दिखाताथातमाशाइकमदारी
सोअबबच्चेतमाशाकररहेहैं
ख़ुदाजानेकीउनकाक्याबनेगा
जोदरियासेकिनाराकररहेहैं
सुलगतीरेतरहरहकहरहीहै
येबादलक्यूँतमाशाकररहेहैं
भुलाकेफ़िक्रहममहशरकी'अरहम'
यहाँबसदुनियादुनियाकररहेहैं
  - Mohd Arham
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