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Amol
haadsa kal raat mere saath aisa ho gaya
haadsa kal raat mere saath aisa ho gaya | हादसा कल रात मेरे साथ ऐसा हो गया
- Amol
हादसा
कल
रात
मेरे
साथ
ऐसा
हो
गया
चूमकर
मैं
होंठ
उस
के
और
प्यासा
हो
गया
- Amol
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इक
रात
उस
ने
चंद
सितारे
बुझा
दिए
उस
को
लगा
था
कोई
उन्हें
गिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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प्यार
की
रात
हो
छत
पर
हो
तेरा
साथ
तो
फिर
चाँद
को
बीच
में
डाला
नहीं
जाता
मुझ
सेे
Waseem Barelvi
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
Mohammad Alvi
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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रात
बाक़ी
थी
जब
वो
बिछड़े
थे
कट
गई
उम्र
रात
बाक़ी
है
Khumar Barabankvi
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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शाम
को
है
लौट
आता
साथ
तेरे
वो
सुकूँ
जो
पूरा
दिन
दिल
ढूँढता
है
Amol
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अब
हमें
इस
सफ़र
से
निकलना
हैं
कुछ
दिनों
बाद
घर
से
निकलना
हैं
हैं
नदामत
इलाही
,
रहम
बरसा
इस
ख़ुदा-ए-कहरस
निकलना
हैं
चूम
लूँ
हाथ
बे-
खौफ
उस
के
बस
ऐ
वबा
तेरे
डर
से
निकलना
हैं
रात
के
ख़्वाब
जो
याद
देती
हैं
बस
मुझे
उस
सहरस
निकलना
हैं
याद
कूचा
-ए-
जाँ
पाँव
को
आए
अब
मुझे
इस
शहरस
निकलना
हैं
तू
हैं
'दीदार'
,
वो
मुंतज़िर
फिर
भी
?
बद-अहद
इस
नजर
से
निकलना
हैं
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Amol
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जल
रहा
ज़ख़्म
हैं
और
मरहम
नहीं
बात
ये
भी
हैं
इस
बात
का
ग़म
नहीं
Amol
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कौन
चाहेगा
तुझे
अब
इस
तरह
से
के
मैं
चाहूँ
तो
तुझे
भी
ना
ख़बर
हो
Amol
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दिल
को
अभी
करार
है
ग़म
आजकल
फरार
है
कोई
भी
आता
जाता
है
दिल
में
कहीं
दरार
है
महँगी
बड़ी
है
कैफियत
सपने
पड़े
उधार
है
मेरी
जो
सिर्फ़
यार
थी
उस
को
मुझी
से
प्यार
है
पूछा
जो
हाल
उस
ने
है
कह
दो
कि
अब
सुधार
है
तस्वीर
थी
तिरी
जहाँ
अब
बस
वहाँ
दीवार
है
ये
ज़िन्दगी
है
बे
-
वफा
जीना
यहाँ
खुमार
है
कहते
तुझे
शराब
क्यूँँ
ये
लोग
सब
बिमार
है
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