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Amol
shaam ko hai laut aata saath tere
shaam ko hai laut aata saath tere | शाम को है लौट आता साथ तेरे
- Amol
शाम
को
है
लौट
आता
साथ
तेरे
वो
सुकूँ
जो
पूरा
दिन
दिल
ढूँढता
है
- Amol
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हुस्न
उनका
सादगी
में
कुछ
अलग
महका
किया
मैंने
धड़कन
से
कहा
धड़को
मगर
आराम
से
Ishq Allahabadi
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिनके
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
Hasrat Jaipuri
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दिल्ली
से
हम
ही
बोला
करें
अम्न
की
बोली
यारो
तुम
भी
कभी
लाहौर
से
बोलो
Rahat Indori
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इतना
तो
ज़िंदगी
में
किसी
के
ख़लल
पड़े
हँसने
से
हो
सुकून
न
रोने
से
कल
पड़े
Kaifi Azmi
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अब
आ
भी
जाओ
के
सुकूंँ
मिले
मुझे
अगर
जो
जाना
था
तो
क्यूँँंँ
मिले
मुझे
ज़माना
हो
न
हो
रकी़ब
बीच
में
तू
अब
कभी
मिले
तो
यूँंँ
मिले
मुझे
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Faiz Ahmad
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बोझ
उठाए
हुए
फिरती
है
हमारा
अब
तक
ऐ
ज़मीं
माँ
तिरी
ये
उम्र
तो
आराम
की
थी
Parveen Shakir
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सिवाए
तालियों
के
कुछ
नहीं
मिलता
ग़ज़लगोई
फ़क़त
धंधा
सुकूँ
का
है
Neeraj Neer
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एक
तख़्ती
अम्न
के
पैग़ाम
की
टांग
दीजे
ऊंचे
मीनारों
के
बीच
Aziz Nabeel
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ग़म
है
तो
कोई
लुत्फ़
नहीं
बिस्तर-ए-गुल
पर
जी
ख़ुश
है
तो
काँटों
पे
भी
आराम
बहुत
है
Kaleem Aajiz
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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अब
हमें
इस
सफ़र
से
निकलना
हैं
कुछ
दिनों
बाद
घर
से
निकलना
हैं
हैं
नदामत
इलाही
,
रहम
बरसा
इस
ख़ुदा-ए-कहरस
निकलना
हैं
चूम
लूँ
हाथ
बे-
ख़ौफ़
उस
के
बस
ऐ
वबा
तेरे
डर
से
निकलना
हैं
रात
के
ख़्वाब
जो
याद
देती
हैं
बस
मुझे
उस
सहरस
निकलना
हैं
याद
कूचा
-ए-
जाँ
पाँव
को
आए
अब
मुझे
इस
शहरस
निकलना
हैं
तू
हैं
'दीदार'
,
वो
मुंतज़िर
फिर
भी
?
बद-अहद
इस
नजर
से
निकलना
हैं
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कौन
चाहेगा
तुझे
अब
इस
तरह
से
के
मैं
चाहूँ
तो
तुझे
भी
ना
ख़बर
हो
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लगा
हूँ
जो
मैं
खर्चे
अब
मेरे
घर
के
उठाने
में
लगेगा
उम्र-भर
क्या
बाप
के
आधा
कमाने
में
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ग़मों
को
मिरे
जो
गिना
जा
रहा
हैं
कि
मशगूल
होके
सुना
जा
रहा
हैं
मिरी
हैं
ये
किस्मत
या
फिर
सजा
हैं
कि
क़ातिल
मुझी
से
चुना
जा
रहा
हैं
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और
फिर
उस
ने
कहाँ
सब
भूल
जाना
ये
मगर
बोला
नहीं
कब
भूल
जाना
याद
वो
बे-इंतिहा
आने
लगा
था
जिस
दफ़ा
उस
ने
कहाँ
अब
भूल
जाना
इक
तरफ़
बारिश
में
तेरी
याद
आना
इक
तरफ़
हैं
ख़ुश्क
दो
लब
भूल
जाना
चाहते
हो
गर
मदद
मुफ़्लिस
की
करना
याद
रखना
अपना
मज़हब
भूल
जाना
हर
इबादत
में
जिसे
माँगा
हैं
तुझ
सेे
हैं
बड़ा
मुश्किल
उसे,
रब
भूल
जाना
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