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Amol
laga hooñ jo main kharche ab mere ghar ke uthaane men
laga hooñ jo main kharche ab mere ghar ke uthaane men | लगा हूँ जो मैं खर्चे अब मेरे घर के उठाने में
- Amol
लगा
हूँ
जो
मैं
खर्चे
अब
मेरे
घर
के
उठाने
में
लगेगा
उम्र-भर
क्या
बाप
के
आधा
कमाने
में
- Amol
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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जो
बुजुर्गों
की
दु'आओं
के
दीयों
से
रौशन
रोज़
उस
घर
में
दीवाली
का
जश्न
होता
है
Pratap Somvanshi
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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उसकी
जो
दी
घड़ी
पहनना
छोड़ा
हैं
वक़्त
जैसे
गुज़रना
तो
भुल
ही
गया
Amol
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और
फिर
उस
ने
कहाँ
सब
भूल
जाना
ये
मगर
बोला
नहीं
कब
भूल
जाना
याद
वो
बे-इंतिहा
आने
लगा
था
जिस
दफ़ा
उस
ने
कहाँ
अब
भूल
जाना
इक
तरफ़
बारिश
में
तेरी
याद
आना
इक
तरफ़
हैं
ख़ुश्क
दो
लब
भूल
जाना
चाहते
हो
गर
मदद
मुफ़्लिस
की
करना
याद
रखना
अपना
मज़हब
भूल
जाना
हर
इबादत
में
जिसे
माँगा
हैं
तुझ
सेे
हैं
बड़ा
मुश्किल
उसे,
रब
भूल
जाना
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ख़्वाबी
मोहब्बत
का
असर
हमनें
हमीं
पर
देखा
हैं
फिर
आज
उस
महताब
को
मैंने
ज़मीं
पर
देखा
हैं
Amol
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कौन
चाहेगा
तुझे
अब
इस
तरह
से
के
मैं
चाहूँ
तो
तुझे
भी
ना
ख़बर
हो
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दिल
को
अभी
करार
है
ग़म
आजकल
फरार
है
कोई
भी
आता
जाता
है
दिल
में
कहीं
दरार
है
महँगी
बड़ी
है
कैफियत
सपने
पड़े
उधार
है
मेरी
जो
सिर्फ़
यार
थी
उस
को
मुझी
से
प्यार
है
पूछा
जो
हाल
उस
ने
है
कह
दो
कि
अब
सुधार
है
तस्वीर
थी
तिरी
जहाँ
अब
बस
वहाँ
दीवार
है
ये
ज़िन्दगी
है
बे
-
वफा
जीना
यहाँ
खुमार
है
कहते
तुझे
शराब
क्यूँँ
ये
लोग
सब
बिमार
है
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