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Amol
Ab hme is safar se nikalna hai
अब हमें इस सफ़र से निकलना हैं
- Amol
अब
हमें
इस
सफ़र
से
निकलना
हैं
कुछ
दिनों
बाद
घर
से
निकलना
हैं
हैं
नदामत
इलाही
,
रहम
बरसा
इस
ख़ुदा-ए-कहरस
निकलना
हैं
चूम
लूँ
हाथ
बे-
खौफ
उस
के
बस
ऐ
वबा
तेरे
डर
से
निकलना
हैं
रात
के
ख़्वाब
जो
याद
देती
हैं
बस
मुझे
उस
सहरस
निकलना
हैं
याद
कूचा
-ए-
जाँ
पाँव
को
आए
अब
मुझे
इस
शहरस
निकलना
हैं
तू
हैं
'दीदार'
,
वो
मुंतज़िर
फिर
भी
?
बद-अहद
इस
नजर
से
निकलना
हैं
- Amol
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लगा
हूँ
जो
मैं
खर्चे
अब
मेरे
घर
के
उठाने
में
लगेगा
उम्र-भर
क्या
बाप
के
आधा
कमाने
में
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ग़मों
को
मिरे
जो
गिना
जा
रहा
हैं
कि
मशगूल
होके
सुना
जा
रहा
हैं
मिरी
हैं
ये
किस्मत
या
फिर
सजा
हैं
कि
क़ातिल
मुझी
से
चुना
जा
रहा
हैं
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ख़्वाबी
मोहब्बत
का
असर
हमनें
हमीं
पर
देखा
हैं
फिर
आज
उस
महताब
को
मैंने
ज़मीं
पर
देखा
हैं
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भुल
गया
हैं
तू
मुझे
पूरी
तरह
से
याद
करने
में
तुझे
क्या
मसअला
अब
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शाम
को
है
लौट
आता
साथ
तेरे
वो
सुकूँ
जो
पूरा
दिन
दिल
ढूँढता
है
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