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100rav
intizaar ke ye din bhi main khushi se kaatta
intizaar ke ye din bhi main khushi se kaatta | इंतिज़ार के ये दिन भी मैं ख़ुशी से काटता
- 100rav
इंतिज़ार
के
ये
दिन
भी
मैं
ख़ुशी
से
काटता
काश
तुमने
भी
पलट
के
देखा
होता
जाते
वक़्त
- 100rav
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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साल
के
आख़िरी
दिन
उसने
दिया
वक़्त
हमें
अब
तो
ये
साल
कई
साल
नहीं
गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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जो
ज़रा
ठीक
से
किरदार
निगारी
हो
जाए
ये
कहानी
तो
हक़ीक़त
पे
भी
तारी
हो
जाए
तेरे
हामी
है
सो
उठ
कर
भी
नहीं
जा
सकते
जाने
किस
वक़्त
यहाँ
राय-शुमारी
हो
जाए
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Khurram Afaq
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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ज़ियादा
देर
कर
दी
आपने
जानाँ
चढ़ा
दो
फूल
अब
आ
ही
गई
हो
तो
100rav
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मैं
चाहता
हूँ
तू
पढ़े
मेरी
मुकम्मल
शा'इरी
पर
तू
समझने
भी
लगे
ऐसे
न
दिन
आए
कभी
100rav
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हाँ
बीच
बीच
में
लिखूँगा
शे'र
कुछ
नए
नए
कहीं
तुम्हें
यक़ीं
न
हो
चले
कि
तुमपे
लिखता
हूँ
100rav
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ख़ुद
को
हरदम
सही
समझती
है
हँसने
को
फिर
हँसी
समझती
है
लिखता
हूँ
बात
दिल
की
मैं
और
वो
बात
को
शा'इरी
समझती
है
दरिया
पे
बस
पियासा
आता
है
वो
मुझे
बस
वही
समझती
है
डूब
कर
आशिक़ी
बताऊँगा
इश्क़
की
आशिक़ी
समझती
है
ज़िंदगी
मैं
जिसे
समझता
हूँ
ग़ैर
को
ज़िंदगी
समझती
है
मैं
दिखूँ
तो
चिपकती
है
उसको
वो
मुझे
छिपकली
समझती
है
कहने
को
दोस्त
हूँ
ना
मैं
तेरा
सच
बता
दोस्ती
समझती
है
हाल
मत
पूछना
तू
सौरभ
का
जीते
जी
ख़ुद-कुशी
समझती
है
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100rav
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मेरा
इक
काम
करके
तुम
चली
जाना
मुझे
बदनाम
करके
तुम
चली
जाना
ख़बर
देना
मैं
आऊँगी
सहर
में
फिर
कहीं
और
शाम
करके
तुम
चली
जाना
दिया
है
दर्द
जो
कोने
में
है
घर
के
इसे
गोदाम
करके
तुम
चली
जाना
ख़रीदा
गाड़ी
घर
ज़ेवर
भी
किश्तों
में
उसे
नीलाम
करके
तुम
चली
जाना
बना
है
हुजरा
मेरे
क़ब्र
पे
आना
वहीं
आराम
करके
तुम
चली
जाना
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100rav
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