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100rav
main chahta hooñ tu parhe meri mukammal shaayri
main chahta hooñ tu parhe meri mukammal shaayri | मैं चाहता हूँ तू पढ़े मेरी मुकम्मल शा'इरी
- 100rav
मैं
चाहता
हूँ
तू
पढ़े
मेरी
मुकम्मल
शा'इरी
पर
तू
समझने
भी
लगे
ऐसे
न
दिन
आए
कभी
- 100rav
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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दिल-ए-नादाँ
तुझे
हुआ
क्या
है
आख़िर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
Mirza Ghalib
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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तमाम
शहर
की
ख़ातिर
चमन
से
आते
हैं
हमारे
फूल
किसी
के
बदन
से
आते
हैं
Farhat Ehsaas
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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इस
क़दर
ग़म
मुझे
रुलाता
था
दोस्त
मनहूस
मानते
थे
तब
100rav
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न
चाहते
हुए
भी
दिल
से
बद-दु'आ
निकल
गई
सँभालना
शजर
बसंत
में
भी
सूख
जाते
हैं
100rav
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धीरे
धीरे
मेरी
माँ
जो
बूढ़ी
होती
जा
रही
है
दिन-ब-दिन
ख़ुशियों
से
जैसे
दूरी
होती
जा
रही
है
100rav
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नहीं
बोलता
मैं
किसी
से
मगर
याद
रखता
हूँ
सब
कुछ
100rav
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सारी
हयात
फिर
न
लगाया
गले
उसे
इक
रोज़
थी
लिबास
से
झलकी
महक
नई
100rav
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