tumhein ik baat kahni thii | तुम्हें इक बात कहनी थी

  - Zubair Ali Tabish
तुम्हेंइकबातकहनीथी
इजाज़तहोतोकहदूँमैं
येभीगाभीगासामौसम
येतितलीफूलऔरशबनम
चमकतेचाँदकीबातें
येबूँदेंऔरबरसातें
येकालीरातकाआँचल
हवामेंनाचतेबादल
धड़कतेमौसमोंकादिल
महकतीख़ुश्बूओंकादिल
येसबजितनेनज़ारेहैं
कहोकिसकेइशारेहैं
सभीबातेंसुनीतुमने
फिरआँखेंफेरलींतुमने
मैंतबजाकरकहींसमझा
कितुमनेकुछनहींसमझा
मैंक़िस्सामुख़्तसरकरके
ज़रानीचीनज़रकरके
येकहताहूँअभीतुमसे
मोहब्बतहोगईतुमसे
  - Zubair Ali Tabish
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