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Yogendra Singh Raghuwanshi
teri apni qismat hai aur meri apni kismat hai
teri apni qismat hai aur meri apni kismat hai | तेरी अपनी क़िस्मत है और मेरी अपनी किस्मत है
- Yogendra Singh Raghuwanshi
तेरी
अपनी
क़िस्मत
है
और
मेरी
अपनी
किस्मत
है
तुझको
तो
संसार
मिला
पर
मुझको
तू
भी
न
मिल
पाया
- Yogendra Singh Raghuwanshi
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
Vashu Pandey
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ऐ
मुस्कुराते
शख़्स
हमारी
तरफ़
न
आ
वापिस
यहाँ
से
कोई
भी
हँस
कर
नहीं
गया
मुझको
तुम्हारे
बाद
किसी
और
की
तरफ़
ले
जा
रहा
था
मेरा
मुक़द्दर
नहीं
गया
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Inaam Azmi
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शायद
अगली
इक
कोशिश
तक़दीर
बदल
दे
ज़हर
तो
जब
जी
चाहे
खाया
जा
सकता
है
Siraj Faisal Khan
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मोहब्बत
अपनी
क़िस्मत
में
नहीं
है
इबादत
से
गुज़ारा
कर
रहे
है
Fahmi Badayuni
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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जिन
की
दर्द-भरी
बातों
से
एक
ज़माना
राम
हुआ
'क़ासिर'
ऐसे
फ़न-कारों
की
क़िस्मत
में
बन-बास
रहा
Ghulam Mohammad Qasir
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दर्द
में
जान
जा
रही
होगी
आँसुओं
में
नहा
रही
होगी
हो
के
मजबूर
इस
ज़माने
से
वो
मेरे
ख़त
जला
रही
होगी
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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साथ
तेरे
और
चल
सकता
नहीं
राख
हूँ
अब
और
जल
सकता
नहीं
आँधियाँ
आएँ
कि
अब
तूफ़ाँ
चलें
राह
अपनी
मैं
बदल
सकता
नहीं
थक
गया
हूँ
बेसबब
चलते
हुए
इश्क़
में
अब
और
चल
सकता
नहीं
जिस्म
की
बेताबियों
से
मात
खा
रूह
को
अब
और
छल
सकता
नहीं
छोड़
दूँगा
ये
जहाँ
तेरे
लिए
अब
तुझे
मैं
और
खल
सकता
नहीं
कब
तलक
पानी
से
मैं
डरता
रहूँ
बर्फ़
हूँ
पर
और
गल
सकता
नहीं
रात
से
मैं
दोस्ती
कैसे
करूँँ
सूर्य
हूँ
अब
और
ढल
सकता
नहीं
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुम
मेरे
दिल
में
और
मैं
बस
तुम
में
गुम
अक्सर
छत
पर
साथ
टहलते
हैं
हम
तुम
Yogendra Singh Raghuwanshi
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उनकी
आँखें
में
बेईमानी
है
उनके
लहज़े
में
बदगुमानी
है
अब
मोहब्बत
कहाँ
है
रिश्ते
में
उनकी
बातों
में
मेहरबानी
है
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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आज
कुरेदा
ख़ुद
को
पन्ना
दर
पन्ना
हर
पन्ने
पर
नाम
तुम्हारा
पाया
है
Yogendra Singh Raghuwanshi
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