saath tere aur chal saktaa nahin | साथ तेरे और चल सकता नहीं

  - Yogendra Singh Raghuwanshi
साथतेरेऔरचलसकतानहीं
राखहूँअबऔरजलसकतानहीं
आँधियाँआएँकिअबतूफ़ाँचलें
राहअपनीमैंबदलसकतानहीं
थकगयाहूँबेसबबचलतेहुए
इश्क़मेंअबऔरचलसकतानहीं
जिस्मकीबेताबियोंसेमातखा
रूहकोअबऔरछलसकतानहीं
छोड़दूँगायेजहाँतेरेलिए
अबतुझेमैंऔरखलसकतानहीं
कबतलकपानीसेमैंडरतारहूँ
बर्फ़हूँपरऔरगलसकतानहीं
रातसेमैंदोस्तीकैसेकरूँँ
सूर्यहूँअबऔरढलसकतानहीं
  - Yogendra Singh Raghuwanshi
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