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Yogendra Singh Raghuwanshi
aaj kureda KHud ko panna dar panna
aaj kureda KHud ko panna dar panna | आज कुरेदा ख़ुद को पन्ना दर पन्ना
- Yogendra Singh Raghuwanshi
आज
कुरेदा
ख़ुद
को
पन्ना
दर
पन्ना
हर
पन्ने
पर
नाम
तुम्हारा
पाया
है
- Yogendra Singh Raghuwanshi
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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ऐसा
लगता
है
कि
तन्हाई
मुझे
छूती
है
उँगलियाँ
कौन
फिरोता
है
मेरे
बालों
में
Ashok Mizaj Badr
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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अजीब
सानेहा
मुझ
पर
गुज़र
गया
यारो
मैं
अपने
साए
से
कल
रात
डर
गया
यारो
Shahryar
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साथ
तेरे
और
चल
सकता
नहीं
राख
हूँ
अब
और
जल
सकता
नहीं
आँधियाँ
आएँ
कि
अब
तूफ़ाँ
चलें
राह
अपनी
मैं
बदल
सकता
नहीं
थक
गया
हूँ
बेसबब
चलते
हुए
इश्क़
में
अब
और
चल
सकता
नहीं
जिस्म
की
बेताबियों
से
मात
खा
रूह
को
अब
और
छल
सकता
नहीं
छोड़
दूँगा
ये
जहाँ
तेरे
लिए
अब
तुझे
मैं
और
खल
सकता
नहीं
कब
तलक
पानी
से
मैं
डरता
रहूँ
बर्फ़
हूँ
पर
और
गल
सकता
नहीं
रात
से
मैं
दोस्ती
कैसे
करूँँ
सूर्य
हूँ
अब
और
ढल
सकता
नहीं
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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लिखते-लिखते
रोक
लिया
हमने
ख़ुद
को
जैसे
तुमने
बहते
आँसू
रोके
हैं
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुम
मेरे
दिल
में
और
मैं
बस
तुम
में
गुम
अक्सर
छत
पर
साथ
टहलते
हैं
हम
तुम
Yogendra Singh Raghuwanshi
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है
नहीं
मंजूर
जीना
बिन
तुम्हारे
मैं
तुम्हारे
साथ
जीना
चाहता
हूँ
तोड़
कर
सारी
रिवाजें
सारी
रस्में
मैं
तुम्हारे
पाँव
छूना
चाहता
हूँ
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Yogendra Singh Raghuwanshi
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आजकल
नींद
ही
नहीं
खुलती
तुमने
पायल
उतार
दी
है
क्या
Yogendra Singh Raghuwanshi
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