ik khushi ke li.e hain kitne gham | इक ख़ुशी के लिए हैं कितने ग़म

  - Yazdani Jalandhari
इकख़ुशीकेलिएहैंकितनेग़म
मुब्तला-ए-सद-आरज़ूहैंहम
दिलभीलौह-ओ-क़लमकाहम-सरहै
दास्तानेंहैंकितनीदिलपेरक़म
अज़्मत-ए-रफ़्तगाँहैनज़रोंमें
अपनेमाज़ीकोढूँडतेहैंहम
पारापाराहैख़ुदजुनूँलेकिन
फ़िक्र-ए-इंसाँइसीसेहैमोहकम
भीगीभीगीहैहरकिरनउनकी
हैसितारोंकीआँखभीपुर-नम
यूँँहोतीसहरकीरुस्वाई
काशखुलतारौशनीकाभरम
हमहैंऔरएहतिराम-ए-हुस्न-ए-वफ़ा
वोहैंऔरएहतिमाम-ए-मश्क़-ए-सितम
कमतरउसकोकहिए'यज़्दानी'
आदमीख़ुदहैजान-ए-दो-आलम
  - Yazdani Jalandhari
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