jaada-e-zeest pe barpa hai tamasha kaisa | जादा-ए-ज़ीस्त पे बरपा है तमाशा कैसा

  - Yazdani Jalandhari
जादा-ए-ज़ीस्तपेबरपाहैतमाशाकैसा
दोस्तबिछड़ाहैहरइकगामपेकैसाकैसा
दिलकाआतिश-कदावीरानपड़ाथाकबसे
आँखसेबहनेलगाआगकादरियाकैसा
उसपेतोफ़स्ल-ए-ख़िज़ाँमारचुकीहैशब-ख़ूँ
मौसम-ए-गुलकेगुज़रजानेकाखटकाकैसा
चाँदसेचेहरेनज़रआनेलगेहैंकितने
खुलगयामेरीनिगाहोंपेदरीचाकैसा
जिसमेंइकअश्कहोआँखकहाँहैवोआँख
बूँदपानीकीहोजिसमेंवोदरियाकैसा
बे-तहाशाजोबढ़ीजातीहैसू-ए-गिर्दाब
नावनेदेखलियाउसमेंकिनाराकैसा
देखमहफ़िलमेंहरइकआँखहैनम'यज़्दानी'
तूनेयेछेड़दियाआजफ़सानाकैसा
  - Yazdani Jalandhari
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