jab ek khauf sa marne ka sar pe baith gaya | जब एक ख़ौफ़ सा मरने का सर पे बैठ गया

  - Yasmeen Sahar
जबएकख़ौफ़सामरनेकासरपेबैठगया
अजीबसायानहूसतकाघरपेबैठगया
यहीकहानीथीबसअपनीबादशाहतकी
फ़क़ीरएकउठाएकदरपेबैठगया
कहींतोशहरमेंअन-बनकिसीकेसाथहुई
जोदुनियाछोड़केसारीवोघरपेबैठगया
तकल्लुफ़ातमेंकुछतोलिहाज़बाक़ीथा
ज़रासीढीलभीक्यादीवोसरपेबैठगया
किसीकीझूटीउड़ाईहुईसीबातसुनी
ज़मानाकानलगाकरख़बरपेबैठगया
सवारहमहुएऐसेहवाकेकाँधेपर
हमारापाँवभीजैसेसफ़रपेबैठगया
  - Yasmeen Sahar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy