दौलत-ए-दर्दसमेटोकिबिखरनेकोहै
रातकाआख़िरीलम्हाभीगुज़रनेकोहै
ख़िश्त-दर-ख़िश्तअक़ीदतनेबनायाजिसको
अब्र-ए-आज़ारउसीघरपेठहरनेकोहै
किश्त-ए-बर्बादसेतजदीद-ए-वफ़ाकरदेखो
अबतोदरियाओंकापानीभीउतरनेकोहै
अपनीआँखोंमेंवहीअक्सलिएफिरतेहैं
जैसेआईना-ए-मक़्सूमसँवरनेकोहै
जोडुबोएगीनपहुँचाएगीसाहिलपेहमें
अबवहीमौजसमुंदरसेउभरनेकोहै
कुंज-ए-तन्हाईमेंखिलताहैतख़य्युलमेरा
औरमैंख़ुशहूँकियेगुलफिरसेनिखरनेकोहै