ufuq tak meraa sehra khil raha hai | उफ़ुक़ तक मेरा सहरा खिल रहा है

  - Yasmeen Hameed
उफ़ुक़तकमेरासहराखिलरहाहै
कहींदरियासेदरियामिलरहाहै
लिबास-ए-अब्रनेभीरंगबदला
ज़मींकापैरहनभीसिलरहाहै
इसीतख़्लीक़कीआसूदगीमें
बहुतबेचैनमेरादिलरहाहै
किसीकेनर्मलहजेकाक़रीना
मिरीआवाज़मेंशामिलरहाहै
मैंअबउसहर्फ़सेकतरारहीहूँ
जोमेरीबातकाहासिलरहाहै
किसीकेदिलकीना-हमवारियोंपर
सँभलनाकिसक़दरमुश्किलरहाहै
  - Yasmeen Hameed
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