ata-e-abr se inkaar karna chahiye tha | अता-ए-अब्र से इंकार करना चाहिए था

  - Yasmeen Hameed
अता-ए-अब्रसेइंकारकरनाचाहिएथा
मैंसहराथीमुझेइक़रारकरनाचाहिएथा
लहूकीआँचदेनीचाहिएथीफ़ैसलेको
उसेफिरनक़्श-बर-दीवारकरनाचाहिएथा
अगरलफ़्ज़बयाँसाकितखड़ेथेदूसरीसम्त
हमींकोरंजकाइज़हारकरनाचाहिएथा
अगरइतनीमुक़द्दमथीज़रूरतरौशनीकी
तोफिरसाएसेअपनेप्यारकरनाचाहिएथा
समुंदरहोतोउसमेंडूबजानाभीरवाहै
मगरदरियाओंकोतोपारकरनाचाहिएथा
दिल-ए-ख़ुश-फ़हमकोसुब्हसफ़रकीरौशनीमें
शब-ए-ग़मकेलिएतय्यारकरनाचाहिएथा
शिकस्त-ए-ज़िंदगीकाअक्सबनकररहगयाहै
वहीलम्हाजिसेशहकारकरनाचाहिएथा
  - Yasmeen Hameed
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