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Yamir Ahsan
idhar tum dikhogi udhar tum dikhogi
idhar tum dikhogi udhar tum dikhogi | इधर तुम दिखोगी, उधर तुम दिखोगी
- Yamir Ahsan
इधर
तुम
दिखोगी,
उधर
तुम
दिखोगी
अभी
इश्क़
का
है
असर,
तुम
दिखोगी
गली
में
बहुत
भीड़
भरने
लगी
है
गली
में
उड़ी
है
ख़बर,
तुम
दिखोगी
- Yamir Ahsan
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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क्यूँँ
सब
इतना
हसीं
है,
नए
साल
पर
कुछ
नया
तो
नहीं
है,
नए
साल
पर
फिर
तमन्ना
मुहब्बत
की
करने
लगे?
फिर
से
तुमको
यक़ीं
है
नए
साल
पर
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Yamir Ahsan
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तिरा
जिस्म
है
हू-ब-हू
याद
मुझको
तू
इतना
बता
दे
मिरा
नाम
क्या
है
Yamir Ahsan
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पंखा
दीवार
और
खिड़कियों
पर
नज़र
जाती
है
रात
यूँँ
ही
गुज़रनी
थी
यूँँ
ही
गुज़र
जाती
है
इश्क़
ने
कौन
सी
तार
जाने
कहाँ
जोड़
दी
दिल
कभी
भरने
लग
जाए
तो
आँख
भर
जाती
है
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Yamir Ahsan
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चाहिए
क्या
और
आफ़त
के
लिए
इश्क़
काफ़ी
है
क़यामत
के
लिए
जान
कर
कुछ
ग़लतियाँ
करता
था
मैं
दिल
तरसता
था
शिकायत
के
लिए
इश्क़
तेरा
बन
गया
है
वो
मिसाल
लोग
देंगे
जिसको
लानत
के
लिए
हमने
उस
सेे
भी
मुहब्बत
कर
ली
है
जो
न
क़ाबिल
था
अदावत
के
लिए
ख़ुश-मिज़ाजी
को
तिरे
समझा
था
इश्क़
माफ़
कर
दे
इस
हिमाक़त
के
लिए
मौत
भी
है
हिज्र
जैसी
कैफ़ियत
क्या
सज़ा
दें
फिर
बग़ावत
के
लिए
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Yamir Ahsan
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इश्क़
में
गुज़रे
थे
ऐसे
इक
दौर
से
मैं
किसी
और
से,
वो
किसी
और
से
Yamir Ahsan
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