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Yamir Ahsan
tira jism hai hoo-b-hoo yaad mujhko
tira jism hai hoo-b-hoo yaad mujhko | तिरा जिस्म है हू-ब-हू याद मुझको
- Yamir Ahsan
तिरा
जिस्म
है
हू-ब-हू
याद
मुझको
तू
इतना
बता
दे
मिरा
नाम
क्या
है
- Yamir Ahsan
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़रा
देर
बैठे
थे
तन्हाई
में
तिरी
याद
आँखें
दुखाने
लगी
Adil Mansuri
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जहाँ
पंखा
चल
रहा
है
वहीं
रस्सी
भी
पड़ी
है
मुझे
फिर
ख़याल
आया,
अभी
ज़िन्दगी
पड़ी
है
Zubair Ali Tabish
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जब
बुलंदी
का
गुमाँ
था
तो
नहीं
याद
आई
अपनी
परवाज़
से
टूटे
तो
ज़मीं
याद
आई
वही
आँखें
कि
जो
ईमान-शिकन
आँखें
हैं
उन्हीं
आँखों
की
हमें
दावत-ए-दीं
याद
आई
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Subhan Asad
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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उस
की
यादों
की
काई
पर
अब
तो
ज़िंदगी-भर
मुझे
फिसलना
है
Siraj Faisal Khan
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तिरा
ख़याल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
कोई
मलाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
उदास
करती
है
अक्सर
तुम्हारी
याद
मुझे
मगर
ये
हाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
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Noon Meem Danish
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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तुम
जाओ
पर
यादों
को
तो
रहने
दो
यादों
का
भी
एक
सहारा
होता
है
Sachin Shalini
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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नहीं
आए
कोई
अंजाम
रिश्तों
के
बदलते
रह
गए
हम
नाम
रिश्तों
के
Yamir Ahsan
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मेरे
दिन
इतनी
तेज़ी
से
ढलने
लगे
मैं
रुका
तो
मिरे
साए
चलने
लगे
जिस
किसी
के
लिए
अपनी
मुट्ठी
कसी
हाथ
से
रेत
जैसे
फिसलने
लगे
तुम
भी
अच्छे
लगे
थे
मुझे
दूर
से
तुम
भी
नज़दीक
आकर
बदलने
लगे
वक़्त
ने
वक़्त
ऐसा
दिखाया
हमें
जो
उगलते
थे
हम
वो
निगलने
लगे
बे-वफ़ाई
पे
इक
शे'र
क्या
पढ़
दिया
लोग
कुर्सी
पे
चढ़
कर
उछलने
लगे
खेलने
का
कभी
शौक़
बदला
नहीं
सिर्फ़
अपने
खिलौने
बदलने
लगे
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Yamir Ahsan
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एक
दम
पाक
हो
गया
हूँ
मैं
ख़ाक
था
ख़ाक
हो
गया
हूँ
मैं
इश्क़
में
डूबना
ही
छोड़
दिया
अच्छा
तैराक
हो
गया
हूँ
मैं
तुम
थे
तो
खौफ़
था,
तुम्हें
खो
कर
कितना
बेबाक
हो
गया
हूँ
मैं
तीर
सबने
चलाए
हैं
मुझ
पर
आम
सा
ताक
हो
गया
हूँ
मैं
मैं
किसी
पर
भी
जच
नहीं
पाता
कैसा
पोशाक
हो
गया
हूँ
मैं
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Yamir Ahsan
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इश्क़
में
गुज़रे
थे
ऐसे
इक
दौर
से
मैं
किसी
और
से,
वो
किसी
और
से
Yamir Ahsan
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इश्क़
उसने
अब
दुबारा
कर
लिया
और
फिर
मुझ
सेे
किनारा
कर
लिया
सारी
दुनिया
जीतने
वालों
ने
भी
दिल
के
सौदे
में
ख़सारा
कर
लिया
हमने
ख़ामोशी
से
हर
मौसम
सहे
जो
मिला
उस
में
गुज़ारा
कर
लिया
हमने
जब
जब
उस
सेे
चाहा
फ़ासला
उसकी
ज़ुल्फ़ों
ने
इशारा
कर
लिया
इस
सेे
ज़्यादा
चाहिए
और
क्या
तुम्हें
बे-वफ़ा
होना
गवारा
कर
लिया
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Yamir Ahsan
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