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Yamir Ahsan
chahiye kya aur aaft ke li.e
chahiye kya aur aaft ke li.e | चाहिए क्या और आफ़त के लिए
- Yamir Ahsan
चाहिए
क्या
और
आफ़त
के
लिए
इश्क़
काफ़ी
है
क़यामत
के
लिए
जान
कर
कुछ
ग़लतियाँ
करता
था
मैं
दिल
तरसता
था
शिकायत
के
लिए
इश्क़
तेरा
बन
गया
है
वो
मिसाल
लोग
देंगे
जिसको
लानत
के
लिए
हमने
उस
सेे
भी
मुहब्बत
कर
ली
है
जो
न
क़ाबिल
था
अदावत
के
लिए
ख़ुश-मिज़ाजी
को
तिरे
समझा
था
इश्क़
माफ़
कर
दे
इस
हिमाक़त
के
लिए
मौत
भी
है
हिज्र
जैसी
कैफ़ियत
क्या
सज़ा
दें
फिर
बग़ावत
के
लिए
- Yamir Ahsan
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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भरम
रखा
है
तेरे
हिज्र
का
वरना
क्या
होता
है
मैं
रोने
पे
आ
जाऊँ
तो
झरना
क्या
होता
है
मेरा
छोड़ो
मैं
नइँ
थकता
मेरा
काम
यही
है
लेकिन
तुमने
इतने
प्यार
का
करना
क्या
होता
है
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Tehzeeb Hafi
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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आख़िरी
बार
चलो
हाथ
मिला
लेते
हैं
फिर
कहाँ
जाने
मुलाक़ात
हमारी
होगी
Yamir Ahsan
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एक
तू
है,
मुझे
तोड़
देता
है
हर
मर्तबा
एक
ये
आस
है
मेरी
जो
टूटती
ही
नहीं
Yamir Ahsan
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मेरे
दिन
इतनी
तेज़ी
से
ढलने
लगे
मैं
रुका
तो
मिरे
साए
चलने
लगे
जिस
किसी
के
लिए
अपनी
मुट्ठी
कसी
हाथ
से
रेत
जैसे
फिसलने
लगे
तुम
भी
अच्छे
लगे
थे
मुझे
दूर
से
तुम
भी
नज़दीक
आकर
बदलने
लगे
वक़्त
ने
वक़्त
ऐसा
दिखाया
हमें
जो
उगलते
थे
हम
वो
निगलने
लगे
बे-वफ़ाई
पे
इक
शे'र
क्या
पढ़
दिया
लोग
कुर्सी
पे
चढ़
कर
उछलने
लगे
खेलने
का
कभी
शौक़
बदला
नहीं
सिर्फ़
अपने
खिलौने
बदलने
लगे
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Yamir Ahsan
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मेरे
लब
से
हटा
के
इक
सिगरेट
अपनी
आदत
लगा
गया
कोई
Yamir Ahsan
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नहीं
दिल
मेरा
मुस्तहकम
ठिकाना
है
मुसाफ़िर
का
बदलता
आशियाना
है
हमारा
दिल
लगा
है
जिस
बगीचे
में
वहाँ
के
फूल
को
भी
टूट
जाना
है
हमारी
रात
यानी
सिर्फ़
तन्हाई
तुम्हारे
साथ
तो
सारा
ज़माना
है
अभी
बाक़ी
है
उम्र-ए-शायरी
मेरी
तिरी
आँखों
से
इक
दरया
बहाना
है
ज़रा
समझो
मिरे
हालात
भी
'यामिर'
नहीं
लगता
है
दिल
लेकिन
लगाना
है
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Yamir Ahsan
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