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Yamir Ahsan
mere lab se hata ke ik cigarette
mere lab se hata ke ik cigarette | मेरे लब से हटा के इक सिगरेट
- Yamir Ahsan
मेरे
लब
से
हटा
के
इक
सिगरेट
अपनी
आदत
लगा
गया
कोई
- Yamir Ahsan
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नहीं
था
ध्यान
कोई
तोड़ते
हुए
सिगरेट
मैं
तुझ
को
भूल
गया
छोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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सिगरेट
जिसे
सुलगता
हुआ
कोई
छोड़
दे
उस
का
धुआँ
हूँ
और
परेशाँ
धुआँ
हूँ
मैं
Ameeq Hanafi
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देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
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Meer Taqi Meer
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क़सम
देता
है
बच्चों
की,
बहाने
से
बुलाता
है
धुआँ
चिमनी
का
हमको
कारख़ाने
से
बुलाता
है
Munawwar Rana
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हमारे
साँस
भी
ले
कर
न
बच
सके
अफ़ज़ल
ये
ख़ाक-दान
में
दम
तोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हमको
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
Khurram Afaq
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मेरी
बातों
को
टाल
देते
थे
बस
हवे
में
उछाल
देते
थे
आप
का
भी
वही
रवय्या
है
आप
की
तो
मिसाल
देते
थे
फ़ासलों
का
सितम
था
एक
तरफ़
फ़ैसले
तक
मलाल
देते
थे
रातें
मुझको
छिपाया
करती
थीं
दिन
तो
ख़ामी
निकाल
देते
थे
अब
न
जाने
कहाँ
गए
वो
लोग
रोने
पर
जो
रुमाल
देते
थे
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Yamir Ahsan
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इश्क़
में
गुज़रे
थे
ऐसे
इक
दौर
से
मैं
किसी
और
से
वो
किसी
और
से
कुछ
न
कुछ
मुश्किलें
ही
हुई
हैं
खड़ी
जब
भी
देखा
गया
है
मुझे
ग़ौर
से
मैंने
इज़हार
अब
कर
दिया
इश्क़
का
उसने
हाँ
भी
कहा
पर
किसी
और
से
हर
घड़ी
हिचकियाँ
आएँगी
बस
तुम्हें
मेरी
ग़ज़लें
पढ़े
जो
कोई
ग़ौर
से
हमने
दोहरा
लिए
पिछले
बाइस
बरस
रात
कटती
नहीं
ये
किसी
तौर
से
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Yamir Ahsan
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चाहिए
क्या
और
आफ़त
के
लिए
इश्क़
काफ़ी
है
क़यामत
के
लिए
जान
कर
कुछ
ग़लतियाँ
करता
था
मैं
दिल
तरसता
था
शिकायत
के
लिए
इश्क़
तेरा
बन
गया
है
वो
मिसाल
लोग
देंगे
जिसको
लानत
के
लिए
हमने
उस
सेे
भी
मुहब्बत
कर
ली
है
जो
न
क़ाबिल
था
अदावत
के
लिए
ख़ुश-मिज़ाजी
को
तिरे
समझा
था
इश्क़
माफ़
कर
दे
इस
हिमाक़त
के
लिए
मौत
भी
है
हिज्र
जैसी
कैफ़ियत
क्या
सज़ा
दें
फिर
बग़ावत
के
लिए
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Yamir Ahsan
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आपके
दीदार
पर
आलम
है
ऐसा
हमने
तो
पी
भी
नहीं
पर
हिल
रहे
हैं
Yamir Ahsan
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साथ
हो
तुम
कि
हम
सराब
में
हैं
ख़्वाब
से
उठ
गए
कि
ख़्वाब
में
हैं
पूछ
लीजे
कभी
पसंद
मेरी
आप
ही
आप
बस
जवाब
में
हैं
उतने
ही
दिन
बचे
हैं
मेरे
पास
जितने
पन्ने
तेरी
किताब
में
हैं
आपकी
ज़ुल्फ़
आँख
लब
चेहरा
आप
जानाँ
मेरी
निसाब
में
हैं
शक्ल
तो
ख़ैर
शक्ल
है
यामिर
उसके
अल्फ़ाज़
तक
हिजाब
में
हैं
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Yamir Ahsan
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