yaksaan kabhi kisi ki na guzri zamaane men | यकसाँ कभी किसी की न गुज़री ज़माने में

  - Yagana Changezi
यकसाँकभीकिसीकीगुज़रीज़मानेमें
यादश-ब-ख़ैरबैठेथेकलआशियानेमें
सद
मेंदिएतोसब्रकीदौलतभीदेगावो
किसचीज़कीकमीहैसख़ीकेख़ज़ानेमें
ग़ुर्बतकीमौतभीसबब-ए-ज़िक्र-ए-ख़ैरहै
गरहमनहींतोनामरहेगाज़मानेमें
दमभरमेंअबमरीज़काक़िस्सातमामहै
क्यूँँकरकहूँयेरातकटेगीफ़सानेमें
साक़ीमैंदेखताहूँज़मींआसमाँकाफ़र्क़
अर्श-ए-बरींमेंऔरतिरेआस्तानेमें
दीवारेंफाँद-फाँदकेदीवानेचलबसे
ख़ाकउड़रहीहैचारतरफ़क़ैद-ख़ानेमें
सय्यादइसअसीरीपेसौजाँसेमैंफ़िदा
दिल-बस्तगीक़फ़सकीकहाँआशियानेमें
हमऐसेबद-नसीबकिअबतकमरगए
आँखोंकेआगेआगलगीआशियानेमें
दीवानेबनकेउनकेगलेसेलिपटभीजाओ
कामअपनाकरलो'यास'बहाने-बहानेमें
  - Yagana Changezi
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