ऐनुक्ता-वरान-ए-सुख़न-आरा-ओ-सुख़न-संज
ऐनग़्मा-गिरान-ए-चमनिस्तान-ए-मआफ़ी
मानाकिदिल-अफ़रोज़हैअफ़्साना-ए-अज़रा
मानाकिदिल-आवेज़हैसलमाकीकहानी
मानाकिअगरछेड़हसीनोंसेचलीजाए
कटजाएगाइसमश्ग़लेमेंअहद-ए-जवानी
गरमाएगायेहमहमाअफ़्सुर्दादिलोंको
बढ़जाएगीदरिया-ए-तबीअतकीरवानी
मानाकिहैंआपअपनेज़मानेके'नज़ीरी'
मानाकिहरइकआपमेंहैउर्फ़ी-ए-सानी
मानाकीहदीस-ए-ख़त-ओ-रुख़्सारकेआगे
बेकारहैमश्शाइयोंकीफ़ल्सफ़ा-दानी
मानाकियहीज़ुल्फ़ओख़त-ओ-ख़ालकीरूदाद
हैमाया-ए-गुल-कारी-ए-ऐवान-ए-मआफ़ी
लेकिनकभीइसबातकोभीआपनेसोचा
येआपकीतक़्वीमहैसदियोंकीपुरानी
माशूक़नएबज़्मनईरंगनयाहै
पैदानएख़ा
मेंहुएहैंऔरनए'मानी'
मिज़्गाँकीसिनाँकेएवज़अबसुनतीहैमहफ़िल
काँटोंकीकथाबरहना-पाईकीज़बानी
लज़्ज़तवोकहाँलाल-ए-लब-ए-यारमेंहैआज
जोदेरहीहैपेटकेभूखोंकीकहानी
बदलाहैज़मानातोबदलिएरविशअपनी
जोक़ौमहैबेदारयेहैउसकीनिशानी
ऐहम-नफ़सोयादरहेख़ूबयेतुमको
बस्तीनईमशरिक़मेंहमींकोहैबसानी