pahunchta hai har ik may-kash ke aage daur-e-jaam us ka | पहुँचता है हर इक मय-कश के आगे दौर-ए-जाम उस का

  - Zafar Ali Khan
पहुँचताहैहरइकमय-कशकेआगेदौर-ए-जामउसका
किसीकोतिश्ना-लबरखतानहींहैलुत्फ़-ए-आमउसका
गवाहीदेरहीहैउसकीयकताईपेज़ातउसकी
दुईकेनक़्शसबझूटेहैंसच्चाएकनामउसका
हरइकज़र्राफ़ज़ाकादास्तानउसकीसुनाताहै
हरइकझोंकाहवाकाकेदेताहैपयामउसका
मैंउसकोका'बा-ओ-बुत-ख़ानामेंक्यूँँढूँडनेनिकलूँ
मिरेटूटेहुएदिलहीकेअंदरहैक़यामउसका
मिरीउफ़्तादकीभीमेरेहक़मेंउसकीरहमतथी
किगिरतेगिरतेभीमैंनेलियादामनहैथामउसका
वोख़ुदभीबे-निशाँहैज़ख़्मभीहैंबे-निशाँउसके
दियाहैइसनेजोचरकानहींहैइल्तियामउसका
जाउसकेतहम्मुलपरकिहैअबढबगिरफ़्तउसकी
डरउसकीदेर-गीरीसेकिहैसख़्तइंतिक़ामउसका
  - Zafar Ali Khan
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