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Manish Kumar Gupta
teri duniya se kaise door jaaun
teri duniya se kaise door jaaun | तेरी दुनिया से कैसे दूर जाऊँ
- Manish Kumar Gupta
तेरी
दुनिया
से
कैसे
दूर
जाऊँ
मुहब्बत
रास्ते
में
पड़
रही
है
- Manish Kumar Gupta
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वो
राही
हूँ
पलभर
के
लिए,
जो
ज़ुल्फ़
के
साए
में
ठहरा,
अब
ले
के
चल
दूर
कहीं,
ऐ
इश्क़
मेरे
बेदाग
मुझे
।
Raja Mehdi Ali Khan
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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ग़ुबार-ए-वक़्त
में
अब
किस
को
खो
रही
हूँ
मैं
ये
बारिशों
का
है
मौसम
कि
रो
रही
हूँ
मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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तुझ
सेे
मेरी
हर
ख़ुशी
है
ज़ीस्त
की
तू
रौशनी
है
तुम
डराओ
मत
क़ज़ा
से
हर
तरफ़
ही
ज़िन्दगी
है
हो
रहा
है
जिस्म
बेजान
रूह
में
अफ़सुर्दगी
है
है
नहीं
कोई
किसी
का
छाई
मुझ
में
बेख़ुदी
है
वस्ल
की
आई
है
शब
आज
दिल
में
मेरे
खलबली
है
क्यूँ
की
तुमने
बेवफ़ाई
आह
इक
दिल
में
दबी
है
कुछ
अलग
है
शौक़
मेरा
ग़ज़लों
से
ही
बंदगी
है
ख़ून
से
लिक्खी
थी
मैंने
जो
ग़ज़ल
तुमने
सुनी
है
मैं
नशा
करता
नहीं
हूँ
फिर
भी
रहती
रिंदगी
है
मौत
के
मरकज़
में
था
मैं
तुम
मिले
तो
ज़िन्दगी
है
कुछ
सही
पहले
नहीं
था
अब
ग़लत
लगता
सही
है
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Manish Kumar Gupta
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इश्क़
तो
बे-वफ़ा
हुआ
जानम
जिस्म
को
जिस्म
ही
सहारा
है
Manish Kumar Gupta
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कोई
साया
नज़र
नहीं
आता
कोई
मेरा
नज़र
नहीं
आता
झाँकता
हूँ
मैं
झील
में
तो
मुझे
अक्स
ख़ुद
का
नज़र
नहीं
आता
शह्र
कोहसार
से
भरा
था
ये
अब
तो
ज़र्रा
नज़र
नहीं
आता
मैं
ग़ज़ल
लिक्खूँ
तो
भला
कैसे
कोई
सफ़्हा
नज़र
नहीं
आता
सब
ही
तन्हा
जिसे
समझते
हैं
वो
तो
तन्हा
नज़र
नहीं
आता
ग़ालिबन
बादलों
में
छुप
गया
है
शम्स
उगता
नज़र
नहीं
आता
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Manish Kumar Gupta
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दिल
लग
गया
है
मेरा
फिर
इक
लड़की
से
बातों
से
वो
तेरी
सहेली
लगती
है
Manish Kumar Gupta
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ऐ
क़जा
कर
तू
इंतज़ार,
अभी
फ़लसफ़ा-ए-हयात
मुबहम
हैं
Manish Kumar Gupta
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