शहर-ए-दिलमेंकोईभीअपनानहीं
दर्दजिससेबाँटलूँ,मिलतानहीं
लम्हा-लम्हातेरीयादेंसाथहैं
दिलहैतन्हापरमगरइतनानहीं
हैंजहाँपक्केमकाँतूवाँबरस
इसनगरमेंघरकोईपक्कानहीं
उम्रतन्हाईमेंमैंनेकाटदी
पासकोईभीमेरेआतानहीं
मुफ़्लिसीनेकरदियाइनकोबड़ा
दिलकिसीकाअबयहाँबच्चानहीं
रूहसबकीयासहै,आँखेंहैंनम
अबबशरसपनेनएबुनतानहीं
देपतादरियाकामुझकोनाख़ुदा
डूबनेकोदरियाभीमिलतानहीं