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Manish Kumar Gupta
shaakh se phool ab juda hogaa
shaakh se phool ab juda hogaa | शाख़ से फूल अब जुदा होगा
- Manish Kumar Gupta
शाख़
से
फूल
अब
जुदा
होगा
सोचकर
ये
उदास
है
माली
- Manish Kumar Gupta
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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फूल
के
होंठों
से
ख़ुश्बू
के
मआनी
सुनकर
अपना
शे'र
अच्छा
लगा
तेरी
ज़ुबानी
सुनकर
Rajesh Reddy
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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बमुश्किल
जीत
पाऊँगा
मैं
ये
जंग
मेरी
तक़दीर
मुझ
सेे
लड़
रही
है
Manish Kumar Gupta
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अश्क
आँखों
में
ला
नहीं
सकते
ज़ख़्म
तुम
को
दिखा
नहीं
सकते
दर्द
इतना
मिला
मोहब्बत
में
यार
अब
दिल
लगा
नहीं
सकते
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Manish Kumar Gupta
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फूल
झड़ने
लगे
हैं
अब
साहब
कल
तलक
आप
देते
थे
गाली
Manish Kumar Gupta
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बुरे
दिन
चल
रहे
है
मेरे
शायद
बिना
ही
बात
दुनिया
अड़
रही
है
Manish Kumar Gupta
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उसकी
हम
पर
ये
मेहरबानी
देख
जिस्म
में
ख़ून
है
न
पानी
देख
ग़म
ने
पीछा
न
आज
तक
छोड़ा
है
यही
मुझ
में
जावेदानी
देख
ख़्वाब
मेरा
है
आई
पी
एस
का
तू
भी
इक
ख़्वाब
आसमानी
देख
एक
तितली
ने
गुल
को
सोख
लिया
हाए
भँवरे
की
पासबानी
देख
इस
सेे
पहले
मैं
अर्ज़-ए-हाल
करूँँ
देख
मेरी
ये
ना-तवानी
देख
मर
गए
कितने
आ
के
चक्कर
में
हम-ज़बानों
की
हम-ज़बानी
देख
कौन
तश्बीह
जा
के
दे
उसको
जब
नहीं
कोई
उसका
सानी
देख
कैसे
लाऊँ
मैं
जीने
का
जज़्बा
साथ
देती
न
ज़िंदगानी
देख
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Manish Kumar Gupta
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