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Manish Kumar Gupta
bure din chal rahe hai mere shaayad
bure din chal rahe hai mere shaayad | बुरे दिन चल रहे है मेरे शायद
- Manish Kumar Gupta
बुरे
दिन
चल
रहे
है
मेरे
शायद
बिना
ही
बात
दुनिया
अड़
रही
है
- Manish Kumar Gupta
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ग़ुबार-ए-वक़्त
में
अब
किस
को
खो
रही
हूँ
मैं
ये
बारिशों
का
है
मौसम
कि
रो
रही
हूँ
मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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कोई
साया
नज़र
नहीं
आता
कोई
मेरा
नज़र
नहीं
आता
झाँकता
हूँ
मैं
झील
में
तो
मुझे
अक्स
ख़ुद
का
नज़र
नहीं
आता
शह्र
कोहसार
से
भरा
था
ये
अब
तो
ज़र्रा
नज़र
नहीं
आता
मैं
ग़ज़ल
लिक्खूँ
तो
भला
कैसे
कोई
सफ़्हा
नज़र
नहीं
आता
सब
ही
तन्हा
जिसे
समझते
हैं
वो
तो
तन्हा
नज़र
नहीं
आता
ग़ालिबन
बादलों
में
छुप
गया
है
शम्स
उगता
नज़र
नहीं
आता
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Manish Kumar Gupta
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अभी
तो
मरहले
हैं
और
बाक़ी
ग़मो
के
हैं
अभी
तो
दौर
बाक़ी
सताना
है
अभी
तो
और
तुझको
अभी
तो
ज़ीस्त
के
हैं
जौर
बाक़ी
ख़बर
तुझको
नहीं,
तेरी
हुई
क्या
तुझी
को
कर
रहे
हैं
ग़ौर
बाक़ी
रिवाजों
रस्मों
में
जकड़ा
हुआ
हूँ
बता
अब
कौन
से
हैं
तौर
बाक़ी
भला
कैसे
मिटाऊँ
भूख
अपनी
नहीं
हैं
पास
मेरे
कौर
बाक़ी
नहीं
बाक़ी
बची
हैं
गर्म
साँसे
घड़ी-भर
भी
नहीं
है
फ़ौर
बाक़ी
छुपा
फिरता
रहा
हूँ
मुद्दतों
से
कहाँ
जाऊँ,
नहीं
है
ठौर
बाक़ी
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Manish Kumar Gupta
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बेबसी
का
इक
नज़ारा
देखिए
कौन
है
क़िस्मत
का
मारा
देखिए
इक
निवाले
को
तरसते
जो
यहाँ
या
ख़ुदा
उनका
इशारा
देखिए
ज़ख़्म
जो
नासूर
बन
के
रिस
रहा
दर्द
हरता
कौन
सारा
देखिए
बेज़ुबाँ
हैं
दर्द
कितने
सह
रहे
कौन
बनता
है
सहारा
देखिए
जो
बिछौना
हैं
बनाए
राह
को
आसमाँ
चादर
सहारा
देखिए
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Manish Kumar Gupta
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ऐ
क़जा
कर
तू
इंतज़ार,
अभी
फ़लसफ़ा-ए-हयात
मुबहम
हैं
Manish Kumar Gupta
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शाख़
से
फूल
अब
जुदा
होगा
सोचकर
ये
उदास
है
माली
Manish Kumar Gupta
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