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Manish Kumar Gupta
koi saaya nazar nahin aata
koi saaya nazar nahin aata | कोई साया नज़र नहीं आता
- Manish Kumar Gupta
कोई
साया
नज़र
नहीं
आता
कोई
मेरा
नज़र
नहीं
आता
झाँकता
हूँ
मैं
झील
में
तो
मुझे
अक्स
ख़ुद
का
नज़र
नहीं
आता
शह्र
कोहसार
से
भरा
था
ये
अब
तो
ज़र्रा
नज़र
नहीं
आता
मैं
ग़ज़ल
लिक्खूँ
तो
भला
कैसे
कोई
सफ़्हा
नज़र
नहीं
आता
सब
ही
तन्हा
जिसे
समझते
हैं
वो
तो
तन्हा
नज़र
नहीं
आता
ग़ालिबन
बादलों
में
छुप
गया
है
शम्स
उगता
नज़र
नहीं
आता
- Manish Kumar Gupta
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तेरी
तस्वीर
अगर
बनाते
हम
तेरे
बारे
में
क्या
बताते
हम
ढूँढ़ना
है
उसे
अंधेरे
में
और
दिया
भी
नहीं
बनाते
हम
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Tajdeed Qaiser
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अजब
अंदाज़
के
शाम-ओ-सहर
हैं
कोई
तस्वीर
हो
जैसे
अधूरी
Asad Bhopali
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मैंने
इक
उम्र
से
बटुए
में
सँभाली
हुई
है
वही
तस्वीर
जो
इक
पल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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जिस
शख़्स
से
शदीद
मोहब्बत
हो
तुमको
वो
तस्वीर
में
दिखाया
गया
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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घर
भरा
होता
है
पर
एक
कमी
होती
है
एक
तस्वीर
बहुत
हँसती
हुई
होती
है
जिनको
चारागरों
की
सूईयाँ
नहीं
चुभती
हैं
ऐसे
बच्चों
को
कोई
बात
चुभी
होती
है
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Rishabh Sharma
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एक
तस्वीर
बनाऊँगा
तेरी
और
फिर
हाथ
लगाऊंगा
तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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इस
तरह
करता
है
हर
शख़्स
सफ़र
अपना
ख़त्म
ख़ुद
को
तस्वीर
में
रखता
है
चला
जाता
है
Sandeep kumar
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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ख़ुदा
हिस्सों
में
किसने
बाँटी
ज़मीं
तू
महदूद
कर
दे
सरकती
ज़मीं
ज़मीं
इश्क़
करती
है
महताब
से
अमावस
की
शब
में
तड़पती
ज़मीं
कभी
चाँद
मिलने
को
आता
है
पास
कभी
चाँद
के
पास
जाती
ज़मीं
नहीं
सोचता
कोई
उनके
लिए
किसानों
को
बहला
के
लूटी
ज़मीं
बहुत
ऊँची
है
ये
इमारत
सुनो
खड़ी
है
जहाँ
पे
है
किसकी
ज़मीं
ज़मीं
दिल
की
जबसे
हुई
रेगज़ार
बहारों
के
बिन
अब
मचलती
ज़मीं
सनम
बेवफ़ाई
का
है
ये
सबब
हिला
दी
है
तुमने
तो
मेरी
ज़मीं
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Manish Kumar Gupta
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नहीं
अच्छा
कि
कोई
ट्रॉल
कर
ले
मुझे
तू
ट्वीट
मत
कर
कॉल
कर
ले
Manish Kumar Gupta
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फूल
झड़ने
लगे
हैं
अब
साहब
कल
तलक
आप
देते
थे
गाली
Manish Kumar Gupta
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शाख़
से
फूल
अब
जुदा
होगा
सोचकर
ये
उदास
है
माली
Manish Kumar Gupta
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बेबसी
का
इक
नज़ारा
देखिए
कौन
है
क़िस्मत
का
मारा
देखिए
इक
निवाले
को
तरसते
जो
यहाँ
या
ख़ुदा
उनका
इशारा
देखिए
ज़ख़्म
जो
नासूर
बन
के
रिस
रहा
दर्द
हरता
कौन
सारा
देखिए
बेज़ुबाँ
हैं
दर्द
कितने
सह
रहे
कौन
बनता
है
सहारा
देखिए
जो
बिछौना
हैं
बनाए
राह
को
आसमाँ
चादर
सहारा
देखिए
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Manish Kumar Gupta
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