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Manish Kumar Gupta
KHuda hisson men kisne baanti zameen
KHuda hisson men kisne baanti zameen | ख़ुदा हिस्सों में किसने बाँटी ज़मीं
- Manish Kumar Gupta
ख़ुदा
हिस्सों
में
किसने
बाँटी
ज़मीं
तू
महदूद
कर
दे
सरकती
ज़मीं
ज़मीं
इश्क़
करती
है
महताब
से
अमावस
की
शब
में
तड़पती
ज़मीं
कभी
चाँद
मिलने
को
आता
है
पास
कभी
चाँद
के
पास
जाती
ज़मीं
नहीं
सोचता
कोई
उनके
लिए
किसानों
को
बहला
के
लूटी
ज़मीं
बहुत
ऊँची
है
ये
इमारत
सुनो
खड़ी
है
जहाँ
पे
है
किसकी
ज़मीं
ज़मीं
दिल
की
जबसे
हुई
रेगज़ार
बहारों
के
बिन
अब
मचलती
ज़मीं
सनम
बेवफ़ाई
का
है
ये
सबब
हिला
दी
है
तुमने
तो
मेरी
ज़मीं
- Manish Kumar Gupta
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गाहे
गाहे
बस
अब
यही
हो
क्या
तुम
सेे
मिलकर
बहुत
ख़ुशी
हो
क्या
Jaun Elia
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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किया
तबाह
तो
दिल्ली
ने
भी
बहुत
'बिस्मिल'
मगर
ख़ुदा
की
क़सम
लखनऊ
ने
लूट
लिया
Bismil Saeedi
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
था,
वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
है
तेरा
नाम
लिखना
किताब
पर,
तेरा
नाम
पढ़ना
किताब
में
Bashir Badr
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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जहाँ
से
लौटना
मुमकिन
नहीं
है
कुछ
ऐसे
मोड़
हैं
उसके
बदन
में
Siddharth Saaz
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बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
जरिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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मैं
सुन
रहा
हूँ
फ़ोन
पे
ख़ामोशियाँ
तेरी
मैं
जानता
हूँ
आज
से
क्या
क्या
तमाम
है
Aslam Rashid
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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अश्क
आँखों
में
ला
नहीं
सकते
ज़ख़्म
तुम
को
दिखा
नहीं
सकते
दर्द
इतना
मिला
मोहब्बत
में
यार
अब
दिल
लगा
नहीं
सकते
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Manish Kumar Gupta
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चाँद
तारों
को
क्यूँँ
खले
तन्हा
हम
भी
इस
आसमाँ
तले
तन्हा
दिन
तो
मसरूफ़
हो
गया
मेरा
हिज्र
की
शब
न
पर
ढले
तन्हा
आह
निकली
न,
दर्द
पी
डाले
आँख
में
ग़म
तेरे
मले
तन्हा
मंज़िलों
से
नहीं
है
बैर
मुझे
जी
दुखाते
हैं
फ़ासले
तन्हा
बेख़ुदी
इस
क़दर
बढ़ी
अपनी
रो
दिए
ख़ुद
के
लग
गले
तन्हा
अक्स
अपना
'मनीष'
झूठा
था
तोड़
आईना,
हम
भले
तन्हा
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Manish Kumar Gupta
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बेबसी
का
इक
नज़ारा
देखिए
कौन
है
क़िस्मत
का
मारा
देखिए
इक
निवाले
को
तरसते
जो
यहाँ
या
ख़ुदा
उनका
इशारा
देखिए
ज़ख़्म
जो
नासूर
बन
के
रिस
रहा
दर्द
हरता
कौन
सारा
देखिए
बेज़ुबाँ
हैं
दर्द
कितने
सह
रहे
कौन
बनता
है
सहारा
देखिए
जो
बिछौना
हैं
बनाए
राह
को
आसमाँ
चादर
सहारा
देखिए
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Manish Kumar Gupta
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शाख़
से
फूल
अब
जुदा
होगा
सोचकर
ये
उदास
है
माली
Manish Kumar Gupta
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उसकी
हम
पर
ये
मेहरबानी
देख
जिस्म
में
ख़ून
है
न
पानी
देख
ग़म
ने
पीछा
न
आज
तक
छोड़ा
है
यही
मुझ
में
जावेदानी
देख
ख़्वाब
मेरा
है
आई
पी
एस
का
तू
भी
इक
ख़्वाब
आसमानी
देख
एक
तितली
ने
गुल
को
सोख
लिया
हाए
भँवरे
की
पासबानी
देख
इस
सेे
पहले
मैं
अर्ज़-ए-हाल
करूँँ
देख
मेरी
ये
ना-तवानी
देख
मर
गए
कितने
आ
के
चक्कर
में
हम-ज़बानों
की
हम-ज़बानी
देख
कौन
तश्बीह
जा
के
दे
उसको
जब
नहीं
कोई
उसका
सानी
देख
कैसे
लाऊँ
मैं
जीने
का
जज़्बा
साथ
देती
न
ज़िंदगानी
देख
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Manish Kumar Gupta
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