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Wajid Husain Sahil
yuñ in aankhoñ ko tadapne ki saza dii usne
yuñ in aankhoñ ko tadapne ki saza dii usne | यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उसने
- Wajid Husain Sahil
यूँँ
इन
आँखों
को
तड़पने
की
सज़ा
दी
उसने
अपनी
तस्वीर
ही
डीपी
से
हटा
दी
उसने
- Wajid Husain Sahil
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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इसी
लिए
तो
है
ज़िंदाँ
को
जुस्तुजू
मेरी
कि
मुफ़लिसी
को
सिखाई
है
सर-कशी
मैं
ने
Ali Sardar Jafri
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ज़िंदगी
से
बड़ी
सज़ा
ही
नहीं
और
क्या
जुर्म
है
पता
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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तुम
मुहब्बत
से
नहीं
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
शायद
तुम
अगर
चाहो
तो
पिंजरा
भी
बदल
सकते
हो
मुंतज़िर
हूँ
मैं
सो
नंबर
भी
नहीं
बदलूँगा
और
तुम
शहर
का
नक़्शा
भी
बदल
सकते
हो
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Vikram Sharma
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जुर्म
में
हम
कमी
करें
भी
तो
क्यूँँ
तुम
सज़ा
भी
तो
कम
नहीं
करते
Jaun Elia
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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तू
मुझे
छोड़
के
ठुकरा
के
भी
जा
सकती
है
तेरे
हाथों
में
मेरे
हाथ
हैं
ज़ंजीर
नहीं
Sahir Ludhianvi
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गर
सज़ा
में
उम्र
भर
की
बा-मशक़्क़त
क़ैद
है
जुर्म
भी
फिर
इश्क़
सा
संगीन
होना
चाहिए
Satyam Shukla
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दिल
पे
अपने
ज़ख़्म
का
बस
इक
निशाँ
रहने
दिया
आग
तो
मैंने
बुझा
दी
पर
धुऑं
रहने
दिया
Wajid Husain Sahil
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इतनी
नज़दीक
से
देखी
है
हक़ीक़त
अब
हम
नाम
सुनते
हैं
मुहब्बत
का
तो
डर
जाते
हैं
Wajid Husain Sahil
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आँखों
की
वॉल
पर
तेरी
फ़ोटो
की
रौशनी
बे-तौर
चुभ
रही
थी
सो
मैंने
निकाल
दी
Wajid Husain Sahil
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लिखा
है
क्या
हमारे
दिल
पे
ख़तरा
कोई
लड़की
इधर
आती
नहीं
है
Wajid Husain Sahil
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जुदा
होकर
कोई
अपनो
से
ऐसा
टूट
जाता
है
की
जैसे
चोट
से
पत्थर
की
शीशा
टूट
जाता
है
मुझे
डोली
उठानी
थी
मगर
मय्यत
उठाता
हूँ
है
ये
भी
फ़र्ज़
पर
इस
में
तो
काँधा
टूट
जाता
है
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Wajid Husain Sahil
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