dariya-e-teergi men bikhrna pada mujhe | दरिया-ए-तीरगी में बिखरना पड़ा मुझे

  - Wafa Naqvi
दरिया-ए-तीरगीमेंबिखरनापड़ामुझे
सूरजकेसाथसाथउतरनापड़ामुझे
दो-चारदिननिगाहकामरकज़रहाकोई
फिरफ़ासलोंकाफ़ैसलाकरनापड़ामुझे
क्याजानेकिसमिज़ाजकेकितनेहबीबथे
अपनीहीआस्तीनसेडरनापड़ामुझे
आँखोंसेउम्र-भरमुलाक़ातहोसकी
बे-कारआइनेमेंसँवरनापड़ामुझे
इकज़िंदगीकोछोड़दियामौतकेलिए
इकज़िंदगीकेवास्तेमरनापड़ामुझे
मीठेसमुंदरोंकेउन्हींसेथेसिलसिले
जिनखट्टेपानियोंमेंठहरनापड़ामुझे
इकसचकीआबरूकीहिफ़ाज़तकेवास्ते
ख़ुदअपनेआपहीसेमुकरनापड़ामुझे
  - Wafa Naqvi
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