kisi ke deeda-e-tar ko nazar men rakhte hain | किसी के दीदा-ए-तर को नज़र में रखते हैं

  - Wafa Naqvi
किसीकेदीदा-ए-तरकोनज़रमेंरखतेहैं
सफ़रमेंख़ुदकोमगरदिलकोघरमेंरखतेहैं
पलटनापड़ताहैहरशामउनपरिंदोंको
जानेकौनसीशयकोशजरमेंरखतेहैं
खुलीफ़ज़ाओंकीवुसअ'तवोकैसेसमझेंगे
जोक़ैदख़्वाबकोदीवार-ओ-दरमेंरखतेहैं
पुकारतेहैंउन्हेंउनकेघरकेसन्नाटे
वोअपने-आपकोक्यूँँरहगुज़रमेंरखतेहैं
ख़ुलूसरखतेहैंलेकिनझुकानहींकरते
अनाकारंगभीथोड़ाहुनरमेंरखतेहैं
  - Wafa Naqvi
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