ahl-e-duniya naya naya hooñ main | अहल-ए-दुनिया नया नया हूँ मैं

  - Vikram Sharma
अहल-ए-दुनियानयानयाहूँमैं
मा'ज़रतख़्वाबदेखताहूँमैं
हैपरिंदोंसेख़ामुशीदरकार
पेड़सेबातकररहाहूँमैं
उसकीतस्वीरहैघड़ीकेपास
हरघड़ीवक़्तदेखताहूँमैं
ख़ुदसेकरताहूँमशवरालेकिन
बातऔरोंकीमानताहूँमैं
इसक़दरतीरगीकाक़ाइलहूँ
धूपकोधूपकहरहाहूँमैं
वाक़िआ'हूँअज़लसेपहलेका
कुनसेपहलेउठीसदाहूँमैं
मुझकोचुप-ज़ातसमझाजाताहै
इसक़दरतेज़चीख़ताहूँमैं
  - Vikram Sharma
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