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Vikas Rana
sochna bhi ajeeb aadat hai
sochna bhi ajeeb aadat hai | सोचना भी अजीब आदत है
- Vikas Rana
सोचना
भी
अजीब
आदत
है
ये
भी
तो
सोचने
की
सूरत
है
अब
मुझे
आप
छोड़
जाइएगा
अब
मुझे
आप
की
ज़रूरत
है
मेरी
सिगरेट
पे
ए'तिराज़
तो
हैं
क्या
मुझे
चूमने
की
हसरत
है
बस
अपने
आप
में
उलझा
हुआ
है
उसे
कह
दो
कि
शे'र
अच्छा
हुआ
है
समुंदर
की
चटाई
खींच
लो
अब
बहुत
दिन
से
यहीं
बैठा
हुआ
है
बुना
था
तुम
ने
पिछली
सर्दियों
में
ये
मैं
ने
हिज्र
जो
पहना
हुआ
है
- Vikas Rana
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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मरने
का
है
ख़याल
ना
जीने
की
आरज़ू
बस
है
मुझे
तो
वस्ल
के
मौसम
की
जुस्तजू
Muzammil Raza
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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तुम्हारी
याद
में
जीने
की
आरज़ू
है
अभी
कुछ
अपना
हाल
सँभालूँ
अगर
इजाज़त
हो
Jaun Elia
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इक
तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल
है
सो
वो
उन
को
मुबारक
इक
अर्ज़-ए-तमन्ना
है
सो
हम
करते
रहेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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'हसरत'
की
भी
क़ुबूल
हो
मथुरा
में
हाज़िरी
सुनते
हैं
आशिक़ों
पे
तुम्हारा
करम
है
आज
Hasrat Mohani
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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जाने
कितने
घटे-बढ़े
होंगे
मुद्दतें
हो
गईं
सितारे
गिने
Vikas Rana
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तुम्हारे
बाद
के
बोसों
में
जानाँ
तुम्हारी
सांस
की
ख़ुशबू
नहीं
थी
Vikas Rana
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सोचता
हूँ
कि
यूँँ
न
हो
इक
दिन
ये
ज़मीं
कोई
आसमाँ
निकले
Vikas Rana
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कोई
लेगा
नहीं
बदला
हमारा
हमीं
को
क़त्ल
है
करना
हमारा
निछावर
जान
भी
है
उस
पे
करनी
अभी
तय
भी
नहीं
मरना
हमारा
हमारे
होंट
के
सहरा
तुम्हारे
तुम्हारी
आँख
का
दरिया
हमारा
अभी
इक
शे'र
कहना
रह
गया
है
अभी
निकला
नहीं
काँटा
हमारा
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Vikas Rana
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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