saikdon gham ki sougaat de kar mujhe | सैंकड़ों ग़म की सौग़ात दे कर मुझे

  - Ved Prakash Malik Sarshar
सैंकड़ोंग़मकीसौग़ातदेकरमुझे
फिरयेकहतेहैंहमनेदियाकुछनहीं
औरभीकुछबचाहोतोदेदोहमें
ताकियेकहसकोकेबचाकुछनहीं
तुमगिरादोनज़रसेकिसीकोअगर
इससेबढ़करतोउसकीसज़ाकुछनहीं
करतोलूँज़िंदगीमेंमोहब्बतसनम
परमोहब्बतमेंग़मकेसिवाकुछनहीं
चलकेथकजाइएथककेमरजाइए
येवोमंज़िलहैजिसकापताकुछनहीं
क्याहुआहैबताक्यूँहैमुझसेख़फ़ा
मैंनेअबतकतोतुझसेकहाकुछनहीं
एकतेरीमोहब्बतकाथाआसरा
अबमिरीज़िंदगीमेंरहाकुछनहीं
थीयेहसरतकीउनसेमिलादीजिए
हमकोमिलकेभीउनसेमिलाकुछनहीं
करदियाहैमुझेउसनेबर्बादयूँँ
किगयाकुछनहींऔररहाकुछनहीं
यूँँबनानेकोसबकुछबनायागया
परमगरउससेअपनाबनाकुछनहीं
  - Ved Prakash Malik Sarshar
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