kahaan tak sunoge zamaane ki baatein | कहाँ तक सुनोगे ज़माने की बातें

  - Ved Prakash Malik Sarshar
कहाँतकसुनोगेज़मानेकीबातें
येइकदूसरेकोलड़ानेकीबातें
मोहब्बतसेरहतेथेआपसमेंहमतुम
तुम्हेंयादहैंउसज़मानेकीबातें
ज़मानेमेंअपनीयेहालतहोती
सुनतेअगरहमज़मानेकीबातें
हैदुनियाकोअम्न-ओ-सुकूँकीज़रूरत
करोख़त्मतूफ़ाँउठानेकीबातें
कुछउसकीरविशकोनहींदेखतेहम
सुनेजारहेहैंज़मानेकीबातें
तुममिटसकोगेहमहीमिटेंगे
ग़लतहैंयेमिटनेमिटानेकीबातें
ज़मानाज़मानासितमगरज़माना
तुम्हेंक्याबताएँज़मानेकीबातें
करेंफ़िक्रकुछअपनेसूद-ओ-ज़ियाँकी
बहुतसुनचुकेहमज़मानेकीबातें
  - Ved Prakash Malik Sarshar
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