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Vashu Pandey
tumhein kaisa lagega gar kisi pinjare men rakh kar ke
tumhein kaisa lagega gar kisi pinjare men rakh kar ke | तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
- Vashu Pandey
तुम्हें
कैसा
लगेगा
गर
किसी
पिंजरे
में
रख
कर
के
कोई
तुम
सेे
कहे
तेरी
हिफ़ाज़त
कर
रहे
हैं
हम
- Vashu Pandey
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ये
लगभग
ग़ैर-मुमकिन
है
ख़ुदाया
पर
निकल
जाए
चराग़ों
के
दिमाग़ों
से
हवा
का
डर
निकल
जाए
इसी
डर
से
सफ़र
भर
में
कहीं
आँखें
नहीं
झपकी
कहीं
ऐसा
न
हो
ग़लती
से
तेरा
घर
निकल
जाए
तरीक़ा
एक
ही
है
बस
सुकूँ
पाने
का
दुनिया
में
यहाँ
से
दिल
निकल
जाए
यहाँ
से
सर
निकल
जाए
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Vashu Pandey
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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वो
दर
बने
या
राह
की
दीवार
ख़ुश
रहे
मैं
बस
ये
चाहता
हूँ
मेरा
यार
ख़ुश
रहे
ऐसा
कोई
नहीं
कि
जिसे
कोई
ग़म
नहीं
ऐसा
कोई
नहीं
जो
लगातार
ख़ुश
रहे
मेहमान
रह
गया
है
ये
बस
चंद
रोज़
का
कोशिश
ये
कीजिएगा
कि
बीमार
ख़ुश
रहे
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Vashu Pandey
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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हालात
इस
कदर
न
थे
दुश्वार
ठीक
थे
चारागरी
से
क़ब्ल
ये
बीमार
ठीक
थे
बेकार
हो
गए
हुए
हैं
जब
से
कार-गर
इस
सेे
तो
मेरी
जान
हम
बेकार
ठीक
थे
उस
पार
लग
रहा
था
कि
इस
पार
मौज
है
इस
पार
सोचते
हैं
कि
उस
पार
ठीक
थे
थे
यूँँ
भी
अपने
चाहने
वाले
बहुत
कि
हम
इंसान
तो
जैसे
भी
थे
फ़नकार
ठीक
थे
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Vashu Pandey
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