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Vashu Pandey
uske haath men baaqi kya rah jaata hai
uske haath men baaqi kya rah jaata hai | उसके हाथ में बाक़ी क्या रह जाता है
- Vashu Pandey
उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
- Vashu Pandey
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हम
ही
में
थी
न
कोई
बात
याद
न
तुम
को
आ
सके
तुम
ने
हमें
भुला
दिया
हम
न
तुम्हें
भुला
सके
Hafeez Jalandhari
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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कितनी
उजलत
में
मिटा
डाला
गया
आग
में
सब
कुछ
जला
डाला
गया
Manish Shukla
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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मैं
क्या
करूँँ
मेरी
बेगम
सुहाग
ढूँढे
है
मेरे
बुझे
हुए
चूल्हे
में
आग
ढूँढ़े
है
वो
दिन
गए
कि
उड़ाते
थे
फ़ाख़्ताएँ
हम
सपेरा
चूहे
के
इक
बिल
में
नाग
ढूँढे
है
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Paplu Lucknawi
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उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
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इलाज
ये
है
कि
मजबूर
कर
दिया
जाऊँ
वगरना
यूँँ
तो
किसी
की
नहीं
सुनी
मैंने
Jaun Elia
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रात-रात
भर
जगने
वाले
तेरी
ख़ैर
आसमान
को
तकने
वाले
तेरी
ख़ैर
उसकी
सब
तस्वीरें
घर
से
बाहर
फेंक
ख़ुद
दीवार
से
लगने
वाले
तेरी
ख़ैर
वक़्त
हमेशा
एक
सा
थोड़ी
रहता
है
मेरे
ऊपर
हँसने
वाले
तेरी
ख़ैर
वो
ख़त
में
आयात
लिखा
करती
थी
और
लिखती
थी
कि
पढ़ने
वाले
तेरी
ख़ैर
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Vashu Pandey
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इसलिए
भी
इस
शजर
से
सबको
इतना
प्यार
है
दे
रहा
है
फल
अभी
ये
और
सायादार
है
ऐ
ख़ुदा
इस
ना-ख़ुदा
की
ख़ैर
हो
ये
नासमझ
ये
समझता
है
कि
इसके
हाथ
में
पतवार
है
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Vashu Pandey
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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ये
लगभग
ग़ैर-मुमकिन
है
ख़ुदाया
पर
निकल
जाए
चराग़ों
के
दिमाग़ों
से
हवा
का
डर
निकल
जाए
इसी
डर
से
सफ़र
भर
में
कहीं
आँखें
नहीं
झपकी
कहीं
ऐसा
न
हो
ग़लती
से
तेरा
घर
निकल
जाए
तरीक़ा
एक
ही
है
बस
सुकूँ
पाने
का
दुनिया
में
यहाँ
से
दिल
निकल
जाए
यहाँ
से
सर
निकल
जाए
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Vashu Pandey
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याद
में
तेरी
शब
भर
तड़पा
नहीं
रहा
हाए
तेरा
वो
'आशिक़
ज़िंदा
नहीं
रहा
मरने
से
ये
एक
सहूलत
मिली
हमें
कम
से
कम
अब
जान
का
ख़तरा
नहीं
रहा
आँगन
में
बस
इक
दीवार
उठी
और
फिर
घर
में
कुछ
भी
पहले
जैसा
नहीं
रहा
तुमको
छत
का
रोना
है
और
उनका
क्या
जिनके
ऊपर
बाप
का
साया
नहीं
रहा
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Vashu Pandey
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