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Vashu Pandey
haalaat is kadar na the dushwaar theek the
haalaat is kadar na the dushwaar theek the | हालात इस कदर न थे दुश्वार ठीक थे
- Vashu Pandey
हालात
इस
कदर
न
थे
दुश्वार
ठीक
थे
चारागरी
से
क़ब्ल
ये
बीमार
ठीक
थे
बेकार
हो
गए
हुए
हैं
जब
से
कार-गर
इस
सेे
तो
मेरी
जान
हम
बेकार
ठीक
थे
उस
पार
लग
रहा
था
कि
इस
पार
मौज
है
इस
पार
सोचते
हैं
कि
उस
पार
ठीक
थे
थे
यूँँ
भी
अपने
चाहने
वाले
बहुत
कि
हम
इंसान
तो
जैसे
भी
थे
फ़नकार
ठीक
थे
- Vashu Pandey
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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लहजा
ही
थोड़ा
तल्ख़
है
दुनिया
के
सामने
वैसे
तो
ठीक
ठाक
हूँ
मैं
बोल-चाल
में
Ankit Maurya
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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कैसे
दिल
का
हाल
सही
हो
सकता
है
जब-तब
यूँँ
तुम
साड़ी
में
दिख
जाओगी
Tanha
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याद
में
तेरी
शब
भर
तड़पा
नहीं
रहा
हाए
तेरा
वो
'आशिक़
ज़िंदा
नहीं
रहा
मरने
से
ये
एक
सहूलत
मिली
हमें
कम
से
कम
अब
जान
का
ख़तरा
नहीं
रहा
आँगन
में
बस
इक
दीवार
उठी
और
फिर
घर
में
कुछ
भी
पहले
जैसा
नहीं
रहा
तुमको
छत
का
रोना
है
और
उनका
क्या
जिनके
ऊपर
बाप
का
साया
नहीं
रहा
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Vashu Pandey
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हम
को
मुश्किल
में
रहने
दे
चारा-गर
आसानी
से
मर
जाऍंगे
समझा
कर
अव्वल
अव्वल
हम
भी
तेरे
जैसे
थे
हम
भी
ख़ुश
होते
थे
देख
के
ख़ुश
मंज़र
नक़्ल-मकानी
शौक़
नहीं
मजबूरी
थी
मैं
घर
से
न
चलता
कैसे
चलता
घर
उन
को
बस
तन्क़ीद
ही
करनी
होती
है
उन
को
क्या
मालूम
ग़ज़ल
के
पस
मंज़र
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Vashu Pandey
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तुम्हें
कैसा
लगेगा
गर
किसी
पिंजरे
में
रख
कर
के
कोई
तुम
सेे
कहे
तेरी
हिफ़ाज़त
कर
रहे
हैं
हम
Vashu Pandey
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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ये
कब
कहते
हैं
कि
आकर
हमको
गले
लगा
ले
वो
मिल
जाए
तो
रस्मन
ही
बस
हाथ
मिला
ले
काफ़ी
है
इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
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Vashu Pandey
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