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Vashu Pandey
vo dar bane ya raah ki deewaar KHush rahe
vo dar bane ya raah ki deewaar KHush rahe | वो दर बने या राह की दीवार ख़ुश रहे
- Vashu Pandey
वो
दर
बने
या
राह
की
दीवार
ख़ुश
रहे
मैं
बस
ये
चाहता
हूँ
मेरा
यार
ख़ुश
रहे
ऐसा
कोई
नहीं
कि
जिसे
कोई
ग़म
नहीं
ऐसा
कोई
नहीं
जो
लगातार
ख़ुश
रहे
मेहमान
रह
गया
है
ये
बस
चंद
रोज़
का
कोशिश
ये
कीजिएगा
कि
बीमार
ख़ुश
रहे
- Vashu Pandey
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दर्द
की
बात
किसी
हँसती
हुई
महफ़िल
में
जैसे
कह
दे
किसी
तुर्बत
पे
लतीफ़ा
कोई
Ahmad Rahi
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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तेरे
होते
हुए
महफ़िल
में
जलाते
हैं
चराग़
लोग
क्या
सादा
हैं
सूरज
को
दिखाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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महफ़िल
में
बैठे
लोगों
को
भाने
लगी
जब
वो
मेरे
अश'आर
फ़रमाने
लगी
Rachit Sonkar
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ब-जुज़
ख़ुदा
के
किसी
का
हम
पे
करम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
किसी
का
सजदा
जबीं
पे
अपनी
रक़म
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
हमारी
चुप्पी
ये
है
ग़नीमत
वगरना
ये
जो
किया
है
तुम
ने
यक़ीन
मानो
हमारा
माथा
गरम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
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Vashu Pandey
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किसी
के
मरहले
का
हल
नहीं
है
तो
फिर
ये
क़ाएदे
का
हल
नहीं
है
यहाँ
उम्मीद
का
सूरज
उगाओ
दिया
इस
ताकचे
का
हल
नहीं
है
ये
लड़की
जान
है
साहब
हमारी
ये
लड़की
बिस्तरे
का
हल
नहीं
है
तो
क्या
हम
यूँॅं
ही
तड़पेंगे
मुसलसल
तो
क्या
इस
वसवसे
का
हल
नहीं
है
हमारा
एक
ही
तो
मसअला
है
हमारे
मसअले
का
हल
नहीं
है
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Vashu Pandey
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आप
जो
ठीक
समझते
हैं
वो
करिए
साहब
ऐसे
मौसम
में
मैं
दफ़्तर
तो
नहीं
आ
सकता
Vashu Pandey
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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तुम्हें
कैसा
लगेगा
गर
किसी
पिंजरे
में
रख
कर
के
कोई
तुम
सेे
कहे
तेरी
हिफ़ाज़त
कर
रहे
हैं
हम
Vashu Pandey
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