mil hi jaani thii munaasib koi qeemat mujh ko | मिल ही जानी थी मुनासिब कोई क़ीमत मुझ को

  - Varun Gagneja Wahid
मिलहीजानीथीमुनासिबकोईक़ीमतमुझको
तूनेसमझाहैमगरमाल-ए-ग़नीमतमुझको
मेरीनींदेंहीसबबहैंमिरीबेदारीका
मेरेख़्वाबोंसेहीहोतीहैअज़िय्यतमुझको
एकरिश्तेकोबचानेकेलिएआठोंपहर
करनीपड़तीहैअमानतमेंख़यानतमुझको
सोचताहूँकिनिकलआऊँमैंबाहरघरसे
ढूँढतीफिरतीहैकुछरोज़सेशोहरतमुझको
मुझसेबढ़करहीनहींकोईभीअबमेराहरीफ़
ख़ुदसेहरवक़्तहीरहतीहैशिकायतमुझको
अबतोहरलम्हाझुकाहैयेअनाकापलड़ा
महँगीपड़नेलगीअबमेरीशराफ़तमुझको
थाकरमकमहीकहाँमुझपेमिरेमालिकका
देखनेकीहीमिलीनाकभीफ़ुर्सतमुझको
ख़ुदकोरखछोड़ाहैअबमैंनेहवापर'वाहिद'
लेकेजातीहैकिधरदेखिएक़िस्मतमुझको
  - Varun Gagneja Wahid
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