un ki nigah-e-naaz ke thukr | उन की निगह-ए-नाज़ के ठुकराए हुए हैं

  - Vafa Malikpuri
उनकीनिगह-ए-नाज़केठुकराएहुएहैं
हमजुर्म-ए-मोहब्बतकीसज़ापाएहुएहैं
येसाया-नशीनान-ए-गुज़र-गाह-ए-तमन्ना
कुछइश्क़केकुछअक़्लकेबहकाएहुएहैं
अबउनकोनईसुब्हकेपैग़ामसुनादो
जोतीरगी-ए-वक़्तसेघबराएहुएहैं
मयछलकेगीमयउबलेगीमयबरसेगीरिंदो
मय-ख़ानेमेंख़ुदशैख़-ए-हरमआएहुएहैं
तौबानहींटूटेगीसुबूआएकिख़ुमआए
मय-कशतिरीआँखोंकीक़समखाएहुएहैं
उनअश्कोंकेक़तरोंकोभीबे-मायासमझो
मज़लूमोंकीआँखोंमेंजगहपाएहुएहैं
अबउनकेतग़ाफ़ुलका'वफ़ा'ज़िक्रछेड़ो
देखोतोवोकिसनाज़सेशरमाएहुएहैं
  - Vafa Malikpuri
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