yaad aayi vo zulf-e-pareshaan | याद आई वो ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ

  - Vafa Malikpuri
यादआईवोज़ुल्फ़-ए-परेशाँ
कटजाएगीअबशब-ए-हिज्राँ
मेरेबा'दजल्वा-ए-जानाँ
कौनकरेगादावत-ए-मिज़्गाँ
तेरागिलाक्यागेसू-ए-जानाँ
मैंभीपरेशाँतूभीपरेशाँ
किसनेदेखाज़ख़्मगुलोंका
करतेरहेसबसैर-ए-गुलिस्ताँ
देखक़फ़समेंआगलगीहै
अब्र-ए-बहाराँअब्र-ए-बहाराँ
अपनीजफ़ापरअपनीवफ़ापर
वोभीपशेमाँहमभीपशेमाँ
एकजिगरकेदाग़सेरौशन
तेराशबिस्ताँमेराशबिस्ताँ
मरकरजीनातूनेसिखाया
ग़म-ए-जानाँग़म-ए-जानाँ
  - Vafa Malikpuri
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