bahut se log hote hain | बहुत से लोग होते हैं

  - Uzma Naqvi
बहुतसेलोगहोतेहैं
जिन्हेंकहनाजिन्हेंसुननानहींआता
सदाएँअपनेपहलूकोझटककर
कानमेंआवाज़भरतीहैं
सदाओंकेकटहरेसेकईबाग़ीहमेशा
भागजातेहैं
मैंअपनेवक़्तकीबाग़ीसदाहूँ
औरमेरानामउज़माहै
मुझे'नक़वी'भीकहतेहैं
मुझेहर्फ़-ए-ज़ियापरजुगनुओंसेदादमिलतीहै
मिराअदबीनसब-नामाज़ियाईहै
मगरदुनियामुझे
इकआफ़्ताबीशहरकहतीहै
  - Uzma Naqvi
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