phaili hain chaar soo mire kyunkar udaasiyaan | फैली हैं चार सू मिरे क्यूँँकर उदासियाँ

  - Uzma Naqvi
फैलीहैंचारसूमिरेक्यूँँकरउदासियाँ
इकबहर-ए-बे-अमाँहैयेबंजरउदासियाँ
ख़ुशियोंकेचारपलभीअगरमिलगएतोक्या
रहतीहैंमेरीज़ातकामेहवरउदासियाँ
उसशोख़कोख़बरदोमैंऐसीनहींमगर
जानेक्यूँँआज-कलहैंयेदिलबरउदासियाँ
ख़ुशियोंकीसरज़मीनहमेंरासहीथी
फिरपारहेहैंख़ुदमेंयेखोकरउदासियाँ
इकज़ब्तथाकिदश्तमेंकोईजमापहाड़
कितनीसुबुक-ख़िरामहैंरोकरउदासियाँ
  - Uzma Naqvi
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